क्या कलावा कैंची से काटना सही है? जानिए उतारने का सही तरीका

punjabkesari.in Sunday, Apr 26, 2026 - 12:49 PM (IST)

नारी डेस्क: कलावा या मोली को हिन्दू धर्म में एक रक्षा सूत्र की तरह माना जाता हैं। बता दे कि  जो की नेगेटिव ऊर्जा या फिर बुरी नज़र और बिमारियों से बचने में रक्षा करता हैं। कहा जाता हैं की सूत का पवित्र धागा ब्रम्हा विष्णु और महेश त्रिशक्तियों का प्रतीक माना जाता हैं।  इसे पूजा के बाद कलाई पर बांधा जाता हैं। ऐसे में कई लोगो के मन में यह सवाल आता हैं कि कलावे को कैंची से काटना चाहिए या नहीं? कलावे को उतारने के बाद उसका क्या करें? कब और कैसे कलावा उतारें?  अगर आप भी कलावे से जुड़े इस तरह के तमाम सवालों के जवाब जानना चाहते हैं? अगर हां, तो उसके लिए पढ़ें ये आर्टिकल।

किस दिन उतारना होता है कलावा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा उतारने के लिए मंगलवार का दिन शुभ माना गया है। इस दिन व्यक्ति अपने हाथ से इसे उतार सकता है। अगर किसी वजह से मंगलवार को यह संभव न हो, तो शनिवार के दिन भी कलावा उतारा जा सकता है। इन दिनों को विशेष रूप से ऊर्जा संतुलन और शुद्धता से जोड़ा जाता है।

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क्या कैंची या चाकू से काटना सही है?

शास्त्रों में कलावे को कैंची, चाकू या किसी भी धारदार वस्तु से काटने की मनाही बताई गई है। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इसे हाथ से ही धीरे-धीरे खोलकर उतारना चाहिए, ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे और किसी तरह की नकारात्मकता न आए।

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पुराने कलावे का क्या करें?

जब कलावा पुराना हो जाए या उतार दिया जाए तो उसे यूं ही कहीं फेंकना सही नहीं माना जाता। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इसे किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। अगर यह संभव न हो, तो पीपल के पेड़ के नीचे जमीन में दबा देना भी शुभ माना जाता है। ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर रहते हैं।

कितने दिन तक पहनना चाहिए कलावा?

शास्त्रों के अनुसार, कलावा लगभग 21 दिनों तक हाथ में बांधकर रखना चाहिए। माना जाता है कि इस दौरान इसमें सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, जो व्यक्ति को बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से बचाती है। एक बार उतारने के बाद उसी कलावे को दोबारा पहनना उचित नहीं माना गया है।

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कलावा उतारने की सही विधि

कलावा उतारने के लिए सबसे पहले स्नान करके स्वयं को शुद्ध करें। इसके बाद घर के मंदिर में बैठकर श्रद्धा के साथ अपने हाथ से कलावा खोलें। उतारने के बाद उसे तुरंत विसर्जित कर दें। अगर उसी समय विसर्जन संभव न हो, तो उसे कुछ समय के लिए मंदिर में रख सकते हैं। पुराना कलावा उतारने के बाद नया कलावा बांधना शुभ माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है, जिसे सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।

 


 


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Content Editor

Priya Yadav

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