भारत की 5000 साल पुरानी योग परंपरा कैसे बनी दुनिया की वेलनेस क्रांति?
punjabkesari.in Sunday, Jun 21, 2026 - 11:41 AM (IST)
नारी डेस्क : हर साल 21 जून को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। कभी भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर मानी जाने वाली 5,000 साल पुरानी योग परंपरा आज वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, मानसिक शांति और संतुलित जीवनशैली का प्रतीक बन चुकी है। भारत से शुरू हुई यह प्राचीन विद्या अब 175 से अधिक देशों में करोड़ों लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गई है।
भारत की प्राचीन धरोहर है योग
योग की जड़ें भारत की हजारों साल पुरानी सभ्यता और वैदिक परंपरा में मिलती हैं। संस्कृत शब्द ‘योग’ का अर्थ है- जोड़ना या एकता स्थापित करना। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक संपूर्ण जीवन पद्धति है। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने योग को आत्मज्ञान और मानसिक शांति प्राप्त करने का माध्यम माना। समय के साथ यह साधना भारत की सीमाओं से निकलकर पूरी दुनिया में स्वास्थ्य और फिटनेस का पर्याय बन गई।

पीएम मोदी ने दिलाई वैश्विक पहचान
योग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद दिसंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड संख्या में देशों का समर्थन मिला। वर्ष 2015 में पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया और तभी से यह दुनिया के सबसे बड़े जनस्वास्थ्य अभियानों में शामिल हो गया। आज न्यूयॉर्क, पेरिस, लंदन, टोक्यो और बीजिंग जैसे बड़े शहरों में हजारों लोग एक साथ योग करते नजर आते हैं। भारतीय दूतावास भी हर साल विभिन्न देशों में योग कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
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क्यों जरूरी है योग?
योग केवल शरीर को फिट रखने तक सीमित नहीं है। नियमित योगाभ्यास से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं
जैसे, तनाव और चिंता में कमी आती है।
एकाग्रता और मानसिक क्षमता बढ़ती है।
ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है।
शरीर में लचीलापन और ऊर्जा बढ़ती है।
नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।
पिछले कुछ वर्षों में हुई कई वैज्ञानिक रिसर्च भी यह साबित कर चुकी हैं कि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद फायदेमंद है।

‘Yoga for Healthy Ageing’ है 2026 की थीम
साल 2026 के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘Yoga for Healthy Ageing’ (स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग) रखी गई है। इसका उद्देश्य लोगों को केवल लंबी उम्र ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।
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दुनिया की वेलनेस क्रांति बन चुका है योग
आज योग भारत की सांस्कृतिक विरासत से आगे बढ़कर दुनिया की सबसे बड़ी वेलनेस क्रांति का हिस्सा बन चुका है। तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच करोड़ों लोग बेहतर जीवन की तलाश में योग को अपना रहे हैं। भारत की यह प्राचीन विद्या अब केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए स्वस्थ शरीर, शांत मन और बेहतर जीवन का मंत्र बन चुकी है।

