रोका जा सकता है सर्वाइकल कैंसर,  फिर भी हर 8 मिनट में इससे क्यों हो रही महिलाओं की मौत?

punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 09:42 AM (IST)

नारी डेस्क:  सर्वाइकल कैंसर, जो एक इलाज योग्य और रोकी जा सकने वाली बीमारी है के कारण दुनिया भर में हर दो मिनट में एक महिला की मौत हो रही है। वहीं भारत में भी सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) एक खामोश लेकिन बेहद गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। यहां हर 8 मिनट में एक महिला की जान सर्वाइकल कैंसर की वजह से चली जाती है, जबकि दुखद सच्चाई यह है कि इस कैंसर से बचाव और शुरुआती पहचान दोनों संभव हैं।


 क्यों बढ़ रहा है सर्वाइकल कैंसर का खतरा?

डॉक्टरों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है HPV (Human Papillomavirus) संक्रमण। समस्या इसलिए गंभीर बनती है क्योंकि महिलाओं में इसके शुरुआती लक्षण साफ नजर नहीं आते। ज्यादातर मामलों में बीमारी का पता देर से चलता है।  शर्म, डर और जानकारी की कमी के कारण महिलाएं जांच नहीं करातीं

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HPV क्या है?

 HPV एक आम वायरस है, यह यौन संपर्क के जरिए फैल सकता है। इसके कुछ हाई-रिस्क स्ट्रेन सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं। अच्छी खबर यह है कि HPV से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। विशेषज्ञों के मुताबिक HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को 70–90% तक कम कर सकती है।  यह वैक्सीन 9 से 14 साल की उम्र में सबसे ज्यादा प्रभावी होती है।  26 साल तक (कुछ मामलों में उससे आगे भी) डॉक्टर की सलाह से लग सकती है। वैक्सीन लेने का मतलब यह नहीं कि जांच की जरूरत खत्म हो जाती है, लेकिन खतरा काफी कम हो जाता है।


 शुरुआती स्क्रीनिंग जरूरी 

सर्वाइकल कैंसर की सबसे बड़ी समस्या है कि  यह धीरे-धीरे बढ़ता है। अगर शुरुआत में पकड़ लिया जाए, तो पूरी तरह ठीक हो सकता है। मुख्य जांच में  Pap Smear Test, HPV DNA Test है।  30 साल के बाद महिलाओं को नियमित स्क्रीनिंग जरूर करानी चाहिए।

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इन महिलाओं को  सावधान रहने की जरूरत 

- जिन्होंने कभी स्क्रीनिंग नहीं कराई
-जिनकी शादी कम उम्र में हुई
-बार-बार इंफेक्शन की समस्या रहती है
- इम्यूनिटी कमजोर है

इसका बचाव है संभव

HPV वैक्सीन जरूर लगवाएं,  नियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग कराएं। किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें। भारत में सर्वाइकल कैंसर से हर 8 मिनट में एक महिला की मौत होना एक चेतावनी है। यह बीमारी न तो अचानक होती है और न ही लाइलाज है। बस जरूरत है जागरूकता, वैक्सीनेशन और समय पर जांचकी। थोड़ी सी जानकारी और एक सही कदम, हजारों महिलाओं की जान बचा सकता है।


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Content Writer

vasudha

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