Holika Dahan 2026:  गर्भवती महिलाएं होलिका दहन पर इन बातों का रखें खास ध्यान

punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 12:28 PM (IST)

 नारी डेस्क: होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व 2 मार्च, सोमवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। सुबह पूजा की जाती है और शाम को होलिका दहन की अग्नि जलाई जाती है। ज्योतिष शास्त्र में होलिका दहन को बहुत प्रभावशाली और ऊर्जावान पर्व माना गया है। इसलिए खासकर गर्भवती महिलाओं को इस दिन कुछ सावधानियां रखने की सलाह दी जाती है।

गर्भवती महिलाओं को क्यों बरतनी चाहिए सावधानी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की अग्नि नकारात्मक ऊर्जा के नाश का प्रतीक है। लेकिन गर्भवती महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से संवेदनशील होती हैं।

तेज आग की गर्मी

अधिक धुआं

भीड़-भाड़

तेज शोर

ये सभी चीजें गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हानिकारक हो सकती हैं। भारत के कई क्षेत्रों में परंपरा है कि गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन की आग से दूर रखा जाता है या अलग कमरे में बैठाया जाता है।

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होलिका दहन के समय गर्भवती महिलाएं क्या करें?

होलिका दहन के समय मानसिक पूजा करें। घर के किसी शांत कमरे में बैठकर भगवान का ध्यान करें। मंत्र जप या प्रार्थना कर सकती हैं। अगर संभव हो तो दीपक जलाकर पूजा करें। भीड़ और शोर से दूर रहें। होलिका की परिक्रमा करने से बचें, चाहें तो मन ही मन परिक्रमा करें। होलिका में अर्पित की जाने वाली सामग्री (जैसे अनाज) को खुद आग में न डालें, किसी अन्य सदस्य से डलवा दें।

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ज्योतिष के अनुसार प्रमुख नियम

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को होलिका की आग और धुएं से दूरी रखनी चाहिए। देर रात तक बाहर न रहें। होलिका की परिक्रमा या अग्नि में आहुति देने से बचें। शांत वातावरण में पूजा करना अधिक शुभ माना जाता है।

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आस्था और स्वास्थ्य का संतुलन जरूरी

धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना अच्छा है, लेकिन स्वास्थ्य सबसे पहले आता है। डॉक्टर और विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखें। होलिका दहन सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। गर्भवती महिलाएं घर पर रहकर भी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा कर सकती हैं। होलिका दहन आस्था और उत्साह का पर्व है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी बहुत जरूरी है। भीड़, धुएं और आग से दूरी बनाकर, घर पर शांत वातावरण में पूजा करना ही सबसे सुरक्षित और शुभ तरीका माना जाता है।

आस्था के साथ सावधानी  यही इस शुभ पर्व का सही संदेश है। 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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