होलिका दहन 2 मार्च को, चंद्र ग्रहण के कारण बदली होली की तारीख

punjabkesari.in Saturday, Feb 28, 2026 - 05:42 PM (IST)

नारी डेस्क : होली का पर्व हर साल बड़े ही उत्साह, उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार होलिका दहन के अगले ही दिन रंगों की होली (धुलंडी) खेली जाती है। लेकिन साल 2026 में चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण इस परंपरा में थोड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण होने की वजह से इस बार होलिका दहन और होली खेलने की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है। ग्रहण और सूतक काल के कारण यह सवाल उठ रहा है कि होलिका दहन कब किया जाएगा और रंगों की होली किस दिन खेलना शुभ रहेगा।

क्यों बना है होली की तारीख को लेकर भ्रम?

पंचांग के अनुसार हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। लेकिन इस बार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण होलिका दहन और धुलंडी की तिथि को लेकर पंचांगभेद की स्थिति बन गई है।

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कब खेली जाएगी रंगों की होली?

धार्मिक मान्यताओं और टैरो विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल रंगों की होली 4 मार्च को मनाना सबसे अधिक शुभ और लाभकारी माना गया है। दरअसल 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ रहा है, जिसके साथ ही सूतक काल भी मान्य होगा। धार्मिक दृष्टि से सूतक काल के दौरान रंग खेलना, उत्सव मनाना और शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है। इसी कारण 3 मार्च को होली खेलने से बचने की सलाह दी गई है।

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2 मार्च को होलिका दहन, लेकिन 3 मार्च को होली क्यों नहीं?

शास्त्रों के अनुसार सामान्य रूप से होलिका दहन के अगले दिन ही धुलंडी खेली जाती है, लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण के कारण स्थिति अलग है। इस साल होलिका दहन 2 मार्च की रात या 3 मार्च की सुबह किया जाएगा, जिसके बाद 3 मार्च को सूतक काल शुरू हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में शुभ कार्य, उत्सव और रंग खेलना वर्जित माना जाता है। इसी वजह से 3 मार्च को होली नहीं खेली जाएगी और रंगों की होली 4 मार्च को मनाना ही उचित और शुभ बताया गया है।

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क्या चंद्र ग्रहण के समय होली खेलना चाहिए?

धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण और सूतक काल के दौरान होली खेलना उचित नहीं माना जाता। इस समय रंग खेलना, किसी भी तरह के शुभ कार्य करना, भोजन पकाना या भोजन ग्रहण करना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि सूतक काल में मंदिरों के कपाट भी बंद रहते हैं। इसलिए ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान आदि करके ही दैनिक और धार्मिक कार्य दोबारा शुरू करने की परंपरा है।

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चंद्र ग्रहण 2026 का समय

ग्रहण शुरू: 3 मार्च, दोपहर 3:20 बजे
ग्रहण समाप्त: 3 मार्च, शाम 6:46 बजे
सूतक काल: 3 मार्च, सुबह 6:20 बजे से
यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल मान्य होगा।

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होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

2 मार्च 2026 (सोमवार): रात 11:53 बजे से 1:26 बजे तक (भद्रा पुच्छ काल)
3 मार्च 2026: सुबह 5:30 बजे से 6:45 बजे तक

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इस साल होलिका दहन 2 मार्च की रात या 3 मार्च की सुबह किया जाएगा, जबकि रंगों की होली (धुलंडी) 4 मार्च 2026 को मनाना शुभ बताया गया है। चंद्र ग्रहण और सूतक काल के कारण 3 मार्च को होली खेलना अशुभ माना गया है, इसलिए इस दिन रंग खेलने से बचने की सलाह दी गई


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Monika

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