Holi 2026: होलाष्टक शुरू होने से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना बढ़ सकती हैं मुश्किलें
punjabkesari.in Friday, Feb 20, 2026 - 03:16 PM (IST)
नारी डेस्क : होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से हो रही है। यह समय होली से ठीक आठ दिन पहले का माना जाता है, जिसे हिंदू धर्म में संवेदनशील और सावधानी बरतने वाला काल कहा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर होलाष्टक शुरू होने से पहले कुछ जरूरी काम पूरे नहीं किए गए, तो घर में वास्तु दोष और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।
होलाष्टक में क्यों बढ़ जाती है नकारात्मक ऊर्जा?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, होलाष्टक के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है। इसी कारण इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। घर से बाहर निकलने, नए काम शुरू करने और बड़े फैसले लेने को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा जाता है।

घर से जुड़े काम पहले ही निपटा लें
अगर आप नया घर बनवा रहे हैं या घर में पेंटिंग, मरम्मत या रिनोवेशन का काम चल रहा है, तो उसे होलाष्टक शुरू होने से पहले पूरा कर लेना शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दौरान घर से जुड़ा कोई भी निर्माण कार्य करने से घर की शांति भंग हो सकती है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
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मांगलिक कार्य होलाष्टक से पहले करें
वास्तु नियमों के अनुसार, होलाष्टक के समय विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन। जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में किए गए मांगलिक कार्यों से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। इसलिए यदि परिवार में कोई शुभ आयोजन तय है, तो उसे होलाष्टक से पहले ही संपन्न कर लेना बेहतर होता है।

टूटी-फूटी चीजें घर से बाहर करें
घर में पड़ी टूटी कुर्सियां, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटे बर्तन या बेकार वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती हैं। होलाष्टक शुरू होने से पहले इन सभी चीजों को घर से बाहर निकाल देना चाहिए, ताकि वास्तु दोष से बचा जा सके।
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भक्ति और आत्म-चिंतन का समय
होलाष्टक को आत्म-चिंतन और साधना का काल माना जाता है। इन आठ दिनों में महामृत्युंजय मंत्र या हनुमान चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक शांति भी मिलती है।

होलाष्टक शुरू होने से पहले जरूरी कार्य पूरे कर लेना और इस दौरान संयम व भक्ति का पालन करना घर और जीवन दोनों के लिए शुभ माना जाता है। वास्तु नियमों का ध्यान रखकर आप नकारात्मक प्रभाव से बच सकते हैं और होली का पर्व सुख-शांति के साथ मना सकते हैं।

