रंगों के त्योहार पर “ब्लड मून” की दस्तक: चंद्र ग्रहण के साए में कैसे मनाएं होली 2026?
punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 10:43 AM (IST)
नारी डेस्क: होली 2026 इस बार सिर्फ रंगों और खुशियों का त्योहार नहीं होगी, बल्कि एक खास खगोलीय संयोग भी साथ लेकर आएगी। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली होली पर इस वर्ष चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। इसलिए लोगों के मन में सवाल है क्या करें, क्या न करें, और किस तरह सुरक्षित व शुभ तरीके से त्योहार मनाएं? आइए, आसान भाषा में पूरी जानकारी समझते हैं।
चंद्र ग्रहण क्या होता है?
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसी घटना को चंद्र ग्रहण कहते हैं। यह केवल पूर्णिमा के दिन ही होता है।
चंद्र ग्रहण के तीन प्रकार होते हैं
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— Bhawna Panchbhaiya (@BPanchbhai59148) February 27, 2026
इस साल होली पर भद्रा और चंद्र ग्रहण दोनों साथ, रंगों का पर्व मनाने का जानिए शुभ मुहूर्त, कैसे बचे ग्रहण दोष और भद्रा से#Holi #Holi2026 #ChandraGrahan
पूर्ण चंद्र ग्रहण – पूरा चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया (अम्ब्रा) में चला जाता है। इस दौरान चंद्रमा लाल दिखता है, इसलिए इसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है।
आंशिक चंद्र ग्रहण – चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा छाया में आता है।
उपछाया चंद्र ग्रहण – चंद्रमा हल्का धुंधला या फीका दिखता है।
होली और चंद्र ग्रहण का खास संयोग
होली हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। चूंकि चंद्र ग्रहण भी पूर्णिमा को ही लगता है, इसलिए यह संयोग धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का संबंध राहु-केतु से माना जाता है। इसलिए इस समय कुछ सावधानियां और नियम अपनाए जाते हैं।
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होलिका दहन और ग्रहण का समय
होली से एक रात पहले होलिका दहन किया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा है।
अगर ग्रहण उसी समय हो तो क्या करें?
पहले अपने शहर में ग्रहण का सही समय जान लें। कोशिश करें कि होलिका दहन ग्रहण शुरू होने से पहले या ग्रहण समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त में किया जाए। ग्रहण काल में कई मंदिर बंद रहते हैं, यह सामान्य परंपरा है।
क्या ग्रहण वाले दिन होली मना सकते हैं?
हां, होली मनाई जा सकती है। लेकिन ज्यादातर नियम ग्रहण के दौरान ही माने जाते हैं। अगर आपके क्षेत्र में ग्रहण दिखाई नहीं देता, तो नियम थोड़े हल्के माने जाते हैं। फिर भी सावधानी रखना अच्छा माना जाता है।
ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें?
क्या न करें: ग्रहण के दौरान नया शुभ काम शुरू न करें। खाना पकाने और खाने से बचें (संभव हो तो)। गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है।
क्या करें: मंत्र जाप या ध्यान करें। भगवान का स्मरण करें। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करें। घर में गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें।
ग्रहण काल में रंगों का महत्व
होली रंगों का त्योहार है और हर रंग का एक अर्थ माना जाता है
पीला – सुख और समृद्धि
हरा – शांति और नई शुरुआत
नीला – आस्था और आशीर्वाद
कहा जाता है कि ग्रहण के दौरान ऊर्जा में बदलाव होता है, इसलिए प्राकृतिक रंगों (फूलों और जड़ी-बूटियों से बने) का इस्तेमाल करना शुभ और सुरक्षित माना जाता है।
ग्रहण के साए में होली मनाने के आसान सुझाव
पहले से ग्रहण का समय पता करें। होलिका दहन शुभ मुहूर्त में करें। प्राकृतिक और त्वचा-सुरक्षित रंगों का उपयोग करें। ग्रहण काल में ध्यान और आत्मचिंतन करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके उत्सव शुरू करें। मिठाइयों और रंगों के साथ सुरक्षित तरीके से आनंद लें। होली खुशियों, रंगों और सकारात्मक ऊर्जा का त्योहार है। अगर इस बार चंद्र ग्रहण भी साथ हो, तो इसे डर की जगह आध्यात्मिक अवसर की तरह देखें। थोड़ी सावधानी, सही समय की जानकारी और सकारात्मक सोच के साथ आप इस अनोखे संयोग को यादगार बना सकते हैं।

