लड़कियों में दिखने लगे ये बदलाव, तो समझो जल्दी जवान हो रही है आपकी बेटी

punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 05:49 PM (IST)

नारी डेस्क: लड़कियां पहले के मुकाबले अब जल्दी प्यूबर्टी (यौवन) तक पहुंच रही हैं।  कुछ साल पहले फेडरेशन ऑफ़ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजिस्ट सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (FOGSI) द्वारा किए गए एक सर्वे में पाया गया कि शहरी भारत में लड़कियों के यौन रूप से परिपक्व होने की उम्र कम हो गई है। इसमें पाया गया कि शहरों में 80% लड़कियां लगभग 11 साल की उम्र में ही प्यूबर्टी तक पहुंच रही हैं - जो पहले के मुकाबले दो साल कम है। इसके अलावा, कई स्टडीज़ में भारत में महिलाओं के मासिक धर्म शुरू होने की उम्र में भी तेज़ी से गिरावट देखी गई है।

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 हर तीन में से एक लड़की हो रही जल्दी जवान

यह आंकड़ा औसत उम्र में काफ़ी कमी की ओर इशारा करता है, जो पहले 13.83 साल हुआ करती थी। आज, हर तीन में से एक लड़की जल्दी परिपक्व हो रही है। तय समय से पहले बड़ा होना माता-पिता और बच्चों के डॉक्टरों (paediatricians) के लिए चिंता का विषय बन गया है। किशोरावस्था जीवन का वह चरण है जिसमें दोनों लिंगों के मनुष्यों में यौन हार्मोन का स्राव शुरू होता है, और यह शारीरिक तथा मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों द्वारा पहचाना जाता है। जहां पुरुषों में यौन परिपक्वता 12 से 16 वर्ष की आयु के बीच आती है, वहीं लड़कियों में किशोरावस्था 10 से 12 वर्ष की आयु के बीच शुरू होती है। लड़कियों में किशोरावस्था का एक महत्वपूर्ण संकेत 'रजोदर्शन' (menarche) है।


लड़कियों में प्यूबर्टी के लक्षण


इस उम्र में बच्चों के लिए शारीरिक संतुष्टि, रूप-रंग और अपनी छवि एक बड़ी चिंता का विषय बन जाते हैं, और कई बच्चे कम आत्म-सम्मान (low self-esteem) की भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। अपने हमउम्र साथियों के समूह में घुलने-मिलने की कोशिश करना; समाज द्वारा स्वीकृत और लोकप्रिय वरिष्ठों तथा साथियों की आदतों और व्यवहार के तरीकों की नकल करना और जब उन्हें अपने भीतर बुनियादी अंतरों का एहसास होता है या वे अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने में असमर्थ रहते हैं, तो स्वयं को सबसे अलग-थलग कर लेना ये कुछ ऐसे सामान्य लक्षण हैं जिनसे होकर कई किशोर लड़कियां गुज़रती हैं। लड़कियों में प्यूबर्टी, पीरियड्स और शरीर में बदलाव का एहसास ज़्यादा साफ़ दिखता है और महीने के बायोलॉजिकल कैलेंडर के हिसाब से ढलना, ऐंठन और दूसरी बातें भी बिहेवियरल पैटर्न पर असर डालती हैं। इससे मूड स्विंग्स बढ़ते हैं, एक्साइटमेंट, गुस्सा, एंग्जायटी और कभी-कभी डिप्रेशन होता है।

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ये है अर्ली प्यूबर्टी का कारण

डॉक्टर बताते हैं- “प्यूबर्टी की शुरुआत काफी हद तक हाइपोथैलेमस, पिट्यूटरी और ओवेरियन एक्सिस में सिग्नल्स के कॉम्प्लेक्स फ्लो के जेनेटिक कंट्रोल से तय होती है जो सेक्सुअल बिहेवियर को मैनेज करते हैं। यह डेवलपमेंट कुछ हद तक गैर-ज़रूरी और एनवायरनमेंटल सिग्नल्स से प्रभावित होता है, जो असल में एडजस्ट करने वाला रोल निभाते हैं। बच्चा अपने साथी से लंबा दिख सकता है, लेकिन इसका एक नुकसान भी है। हड्डियां समय से पहले बढ़ना बंद कर सकती हैं, जिससे बड़े होने पर उसकी हाइट कम हो सकती है। जल्दी प्यूबर्टी किसी भी बच्चे पर बहुत ज़्यादा साइकोलॉजिकल और फिजिकल दबाव डाल सकती है। जिन लड़कियों में ज़्यादा इमोशनल झुकाव होता है, वे प्यूबर्टी से जुड़े सोशल स्टिग्मा के प्रति ज़्यादा कमज़ोर होती हैं। काउंसलिंग और अच्छी पेरेंटिंग इस समय इन ‘युवा महिलाओं’ की मदद कर सकती है। लाइफस्टाइल में बदलाव - जैसे एक्सरसाइज, आउटडोर एक्टिविटी और हेल्दी डाइट - भी लड़कियों के वज़न पर कंट्रोल रख सकते हैं और इस तरह प्यूबर्टी में देरी कर सकते हैं।
 


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Content Writer

vasudha

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