काजोल और बेटी नीसा के बीच भी होती थी तकरार, इन 5 तरीकों से ऐसे संभालें रिश्ते की नाज़ुक डोर

punjabkesari.in Tuesday, Apr 28, 2026 - 01:30 PM (IST)

 नारी डेस्क:  बॉलीवुड एक्ट्रेस Kajol ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी Nysa Devgan करीब 12 साल की थीं, तब मां-बेटी के बीच अक्सर बहस और झगड़े हो जाया करते थे। एक बार तो गुस्से में उन्होंने फोन तक तोड़ दिया था। यह सुनने में भले चौंकाने वाला लगे, लेकिन सच यह है कि ऐसी स्थिति हर दूसरे घर में देखने को मिलती है। टीनएज का दौर ही ऐसा होता है, जहां भावनाएं तेज होती हैं और समझ थोड़ी उलझी हुई। ऐसे में रिश्तों में टकराव होना बिल्कुल आम बात है। टीनएज में क्यों बढ़ जाते हैं झगड़े  आइए जानते हैं ।

दिमाग अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता

किशोरावस्था में बच्चों का दिमाग तेजी से विकसित हो रहा होता है। वह हिस्सा, जो फैसले लेने, गुस्सा कंट्रोल करने और सही-गलत समझने में मदद करता है, पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। यही वजह है कि मां की बात उन्हें टोका-टोकी या डांट जैसी लग सकती है।

काजोल ने नहीं चलने दिया बेटी का 'काला जादू',काली साड़ी पहनकर ढेर कर दिया नीसा का देसी ग्लैमर

अपनी पहचान बनाने की चाह

इस उम्र में हर लड़की अपनी अलग पहचान बनाना चाहती है। वह खुद के फैसले लेना चाहती है और खुद को समझने की कोशिश करती है। ऐसे में मां की सलाह भी कई बार उसे कंट्रोल जैसा महसूस होती है। टीनएज में इमोशन्स बहुत स्ट्रॉन्ग होते हैं। छोटी-सी बात भी बड़ी लग सकती है। जो बात मां को सामान्य लगे, वही बेटी के लिए बहुत ज्यादा असर डाल सकती है।

यह प्यार की कमी नहीं, बदलाव का दौर है

मां-बेटी दोनों को यह समझना जरूरी है कि यह दूरी या झगड़े प्यार की कमी नहीं होते। यह एक ऐसा फेज होता है, जहां बच्चा बड़ा हो रहा होता है और खुद को समझने की कोशिश कर रहा होता है। यह बदलाव ही रिश्ते को एक नए स्तर पर ले जाता है।

ये भी पढ़ें: दुनिया का सबसे मनहूस गाना! 100 से ज़्यादा लोगों ने की आत्महत्या, भूलकर भी मत सुनना

मां क्या करें? रिश्ते को ऐसे संभालें

बेटी को यह महसूस कराएं कि उसकी बात सुनी जा रही है। बिना सुने सलाह देना अक्सर झगड़े की वजह बन जाता है। हर छोटी बात को मुद्दा बनाने से रिश्ते में दूरी बढ़ती है। जरूरी बातों पर ही सख्ती दिखाएं। बेटी की फीलिंग्स को समझना जरूरी है। इससे भरोसा मजबूत होता है, भले आप उसकी हर बात से सहमत न हों। अपनी भावनाएं साफ तरीके से बताएं, लेकिन उन पर दबाव न बनाएं। माफी मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि रिश्ते को मजबूत बनाने का तरीका है।

PunjabKesari

बेटियों को भी समझनी होंगी ये बातें

कभी-कभी मां का बोलने का तरीका सख्त हो सकता है, लेकिन उनके पीछे चिंता ही होती है। अगर गुस्सा आ रहा है, तो बहस करने की बजाय शांत तरीके से थोड़ा वक्त मांगें। अपनी बातें खुद बताने से मां की चिंता कम होती है और रिश्ता बेहतर बनता है। मां भी इस नए दौर को समझने की कोशिश कर रही होती हैं, उन्हें भी समय चाहिए। झगड़े के बाद ‘सॉरी’ कहना या बात साफ करना रिश्ते को मजबूत बनाता है।

रिश्ते की असली ताकत है बातचीत

किशोरावस्था का समय चुनौतीपूर्ण जरूर होता है, लेकिन यही वह समय भी है जब रिश्ते और मजबूत बन सकते हैं। जो परिवार बातचीत बंद नहीं करते, वही हर मुश्किल से आसानी से निकल जाते हैं। मां-बेटी के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर संवाद बना रहे, तो यही रिश्ता जिंदगी का सबसे मजबूत सहारा बन जाता है।

PunjabKesari


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Priya Yadav

Related News

static