9 साल की बच्ची की Heart Attack से मौत, बॉडी में पहले दिखते ये संकेत
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 08:56 PM (IST)
नारी डेस्क : राजस्थान के नागौर जिले से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। स्कूल में खेलते समय अचानक 9 साल की बच्ची जमीन पर गिर पड़ी और कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बच्ची की मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या बच्चों को भी हार्ट अटैक आ सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही यह दुर्लभ हो, लेकिन बच्चों में भी दिल का दौरा पड़ सकता है और कई बार इसके संकेत पहले ही दिखाई देने लगते हैं, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है।
क्या बच्चों को हार्ट अटैक आ सकता है?
डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों में हार्ट अटैक आम नहीं है, लेकिन जन्मजात हृदय रोग, अनहेल्दी लाइफस्टाइल, गलत खानपान और समय पर जांच न होने के कारण बच्चों में दिल की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। सही समय पर लक्षण पहचान लिए जाएं, तो जान बचाई जा सकती है।
नागौर में 9 साल की दिव्या को स्कूल हार्ट अटैक,
खेलते समय बच्ची गिरी बेहोश
अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत बताया
प्राथमिक जांच में कार्डियक अरेस्ट
भाई की भी ऐसे ही हो चुकी मौत#Rajasthan pic.twitter.com/ZMqvJmAiGa
— TUSHAR DIVAKAR (@DivakarTushar) February 26, 2026
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बच्चों में हार्ट अटैक आने से पहले दिखने वाले संकेत
अगर बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है
हर समय थकान महसूस होना
दिल की धड़कन का बहुत तेज या अनियमित होना
हल्की एक्सरसाइज या खेल के दौरान जल्दी थक जाना
सीने में दर्द या भारीपन
सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी
खेलते-खेलते अचानक चक्कर आना या गिर जाना।

हार्ट अटैक आने पर बच्चों में क्या लक्षण दिखते हैं?
हार्ट अटैक के समय बच्चों में ये गंभीर संकेत दिखाई दे सकते हैं:
अचानक तेज सांस फूलना
दिल के आसपास तेज दर्द होना।
ठंडा पसीना आना।
चक्कर आना और बेहोश हो जाना
खेल या दौड़ते समय अचानक गिर पड़ना
ऐसी स्थिति में एक पल की भी देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
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बच्चों में हार्ट अटैक आने के कारण
गलत खानपान: जरूरत से ज्यादा तला-भुना, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने से बच्चों में कम उम्र में ही खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है, जो दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी: अगर बच्चा मोबाइल, टीवी या वीडियो गेम में ज्यादा समय बिताता है और खेलकूद नहीं करता, तो मोटापा बढ़ता है और दिल पर दबाव पड़ता है।
मानसिक तनाव: पढ़ाई का दबाव, डर, अकेलापन या भावनात्मक तनाव बच्चों में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ाता है, जो दिल की सेहत को प्रभावित करता है।
खराब लाइफस्टाइल और फैमिली हिस्ट्री: नींद पूरी न होना, अनियमित दिनचर्या और परिवार में पहले से दिल की बीमारी का इतिहास भी बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है।

माता-पिता के लिए जरूरी सलाह
बच्चे की डाइट में फल, सब्जियां, दूध और घर का बना खाना शामिल करें
रोजाना खेलने और फिजिकल एक्टिविटी के लिए समय दें
बच्चे के व्यवहार, थकान और सांस की समस्या पर ध्यान दें
किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
बच्चों में हार्ट अटैक दुर्लभ जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। नागौर की यह घटना सभी माता-पिता के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सेहत को हल्के में न लें। समय पर पहचान और सही इलाज से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

