कैंसर से लड़ीं, जीता सौंदर्य का ताज...अब International Stage पर करेंगी India को Represent

punjabkesari.in Monday, Aug 31, 2026 - 10:07 AM (IST)

नारी डेस्क:   देहरादून की बेटी गुनगुन बियाल ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर को अपनी ताकत बना लिया। तीन साल तक ब्लड कैंसर से जूझने और इलाज कराने के बाद गुनगुन ने राष्ट्रीय स्तर की सौंदर्य प्रतियोगिता पीएंडआई इंडिया 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। अहमदाबाद में आयोजित प्रतियोगिता में देशभर से पहुंचीं प्रतिभागियों के बीच गुनगुन ने अपने आत्मविश्वास, दृढ़ता और संघर्ष की कहानी के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। इस जीत के साथ अब वह वर्ष 2027 में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

साधारण परिवार से निकलीं गुनगुन

23 वर्षीय गुनगुन बियाल देहरादून के डांडीपुर की रहने वाली हैं। उनका परिवार सामान्य पृष्ठभूमि से है। उनके पिता गुलशन बियाल एक दुकान में काम करते हैं, जबकि मां विनीता बियाल एलआईसी एजेंट हैं। उनकी बड़ी बहन विशाखा बियाल एयरलाइन में केबिन क्रू हैं। गुनगुन इससे पहले मिस टीन उत्तराखंड का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं। मॉडलिंग और सौंदर्य प्रतियोगिताओं की दुनिया में आगे बढ़ने का उनका सपना था, लेकिन जिंदगी ने अचानक ऐसा मोड़ लिया, जिसने उनके सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।

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ब्लड कैंसर का पता चला तो बदल गई जिंदगी

गुनगुन को ब्लड कैंसर का पता चलने के बाद उनके जीवन की रफ्तार थम सी गई। अहमदाबाद में उनका इलाज चला और करीब तीन साल तक वह बीमारी से लड़ती रहीं। इस दौरान उन्हें अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ी। इलाज और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बीच भी उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया।गुनगुन का तीन साल लंबा इलाज इसी 25 अगस्त को सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इलाज पूरा होने के कुछ ही समय बाद 23 अगस्त को वह राष्ट्रीय स्तर की सौंदर्य प्रतियोगिता में शामिल हुईं। बीमारी से जूझने के बावजूद प्रतियोगिता के मंच पर उनका आत्मविश्वास देखने लायक था। उन्होंने अपनी जीवन यात्रा को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और प्रतियोगिता में जीत दर्ज की।

बीमारी के बाद दोबारा शुरू की पढ़ाई

बीमारी के कारण नौकरी छूटने के बाद गुनगुन ने अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने बीबीए की पढ़ाई शुरू की। इलाज, पढ़ाई और अपने सपनों को एक साथ आगे बढ़ाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय खुद को लगातार व्यस्त और सकारात्मक बनाए रखा। गुनगुन का कहना है कि मुश्किल समय इंसान को कमजोर करने के बजाय भीतर से मजबूत भी कर सकता है। जरूरत इस बात की है कि व्यक्ति परिस्थितियों से भागने के बजाय उनका सामना करे।

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‘हीलिंग स्पेस’ से दे रही हैं सकारात्मक रहने का संदेश

कैंसर से जूझने के दौरान गुनगुन ने ‘हीलिंग स्पेस’ नाम से एक मंच की शुरुआत की। इसके जरिए वह लोगों में सकारात्मक सोच, मानसिक मजबूती और खुद पर भरोसा बनाए रखने का संदेश देती हैं। उनका मानना है कि जिंदगी में मुश्किलें आती हैं, लेकिन उनसे लड़ते हुए अपनी भावनाओं को दबा देना सही नहीं है। वह लोगों को यह संदेश देती हैं कि मजबूत बनना जरूरी है, लेकिन मजबूत बनने की कोशिश में अपनी संवेदनाओं और भावनाओं को खत्म नहीं करना चाहिए।

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रंग-बिरंगी कैंडल के साथ भेजती हैं उम्मीद का संदेश

गुनगुन रंग-बिरंगी कैंडल भी बनाती हैं और उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेचती हैं। खास बात यह है कि वह हर कैंडल के साथ एक भावनात्मक संदेश वाला कार्ड भी भेजती हैं। इन संदेशों में वह लोगों को मुश्किल परिस्थितियों में हार न मानने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका संदेश होता है कि जिंदगी चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका मानना है कि संघर्ष के बीच इंसान को मजबूत जरूर बनना चाहिए, लेकिन अपनी भावनाओं को जिंदा रखना भी उतना ही जरूरी है।

2027 में अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखेगा गुनगुन का हुनर

23 अगस्त को आयोजित राष्ट्रीय स्तर की पीएंडआई इंडिया 2026 प्रतियोगिता में जीत हासिल करने के बाद गुनगुन के लिए अगला पड़ाव अंतरराष्ट्रीय मंच होगा। वर्ष 2027 में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। गुनगुन की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने बीमारी से जूझते हुए अपने सपनों को छोड़ा नहीं। तीन साल के इलाज के बाद जब उन्होंने सौंदर्य प्रतियोगिता का ताज अपने नाम किया, तो यह जीत सिर्फ एक प्रतियोगिता की जीत नहीं रही, बल्कि उनके संघर्ष, हिम्मत और खुद पर विश्वास की भी जीत बन गई।
  
 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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