भारतीय रसोई में की गई ये गलतियां बढ़ा रही Cancer का खतरा

punjabkesari.in Thursday, Sep 17, 2026 - 09:20 PM (IST)

नारी डेस्क: कैंसर आज ऐसी बीमारी है जो तेजी से अपने पैर पसार रही है। लाइफस्टाइल के साथ-साथ खाना बनाने की आदतें भी इस बीमारी को बढ़ावा दे रही है। भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई चीजें हमारे भोजन का हिस्सा हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थों को गलत तरीके से रखने या बहुत अधिक तापमान पर पकाने से ऐसे हानिकारक रसायन बन सकते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं? बार-बार एक ही तेल को गर्म करना, भोजन को जरूरत से ज्यादा भूनना या जला हुआ खाना खाना ऐसी आदतें हैं, जिनसे बचना चाहिए। आइए जानते हैं रसोई की किन चीजों और आदतों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

बार-बार गर्म किया हुआ तेल

समोसे, पकौड़े, पूरियां या दूसरी तली हुई चीजें बनाने के बाद बचे हुए तेल को कई बार गर्म करके इस्तेमाल करना आम आदत है। लेकिन तेल को बार-बार तेज आंच पर गर्म करने से उसमें कुछ हानिकारक रासायनिक पदार्थ बन सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे तेल का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

क्या करें: तेल को बार-बार गर्म करने से बचें। तेल से धुआं निकलने लगे तो उसे बहुत अधिक गर्म न करें।
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जला हुआ या बहुत ज्यादा भुना खाना

खाने को बहुत ज्यादा भूनने या जलने तक पकाने से कुछ हानिकारक रासायनिक पदार्थ बन सकते हैं। खासतौर पर मांस को बहुत तेज आंच पर या सीधे आग के संपर्क में पकाने पर ऐसे पदार्थों की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए भोजन को काला या जला हुआ होने तक पकाने से बचना बेहतर है।

क्या करें: यदि भोजन का कोई हिस्सा जल गया है तो उस जले हुए हिस्से को खाने से बचें और भोजन को मध्यम आंच पर पकाएं।

बहुत तेज आंच पर खाना पकाना

बहुत अधिक तापमान पर भोजन पकाने की आदत भी ध्यान देने योग्य है। लंबे समय तक तेज आंच पर तलने, भूनने या सेंकने से भोजन में ऐसे रासायनिक पदार्थ बन सकते हैं, जिनका अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जाता। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर तरह का तला या भुना हुआ भोजन कैंसर का कारण बनता है। चिंता मुख्य रूप से लंबे समय तक अत्यधिक तापमान पर पकाने और ऐसे भोजन के लगातार सेवन को लेकर है।

फफूंद लगे अनाज और मेवे

गलत तरीके से रखे गए अनाज, मूंगफली, मेवे और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों में फफूंद लग सकती है। ऐसी फफूंद से बनने वाला एक विषैला पदार्थ लंबे समय तक शरीर में जाने पर यकृत के कैंसर के खतरे से जुड़ा पाया गया है।

क्या करें: फफूंद लगी, बदरंग या खराब दिखाई देने वाली मूंगफली, मेवे और अनाज को केवल धोकर इस्तेमाल न करें। ऐसे खाद्य पदार्थों को फेंक देना ही बेहतर है। अनाज और मेवों को नमी से बचाकर सूखी जगह पर रखें।

डिब्बाबंद खाना 

सॉसेज, बेकन और हैम जैसे संरक्षित मांस को लंबे समय तक और अधिक मात्रा में खाने का संबंध आंत के कैंसर के बढ़े हुए खतरे से पाया गया है। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

रसोई में इन बातों का रखें ध्यान

तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल न करें।
भोजन को काला या पूरी तरह जलने तक न पकाएं।
बहुत तेज आंच पर लंबे समय तक खाना पकाने से बचें।
फफूंद लगे अनाज, मेवे और मूंगफली को इस्तेमाल न करें।
भोजन को सूखी और साफ जगह पर सही तरीके से रखें।
तले और अत्यधिक भुने भोजन की मात्रा सीमित रखें।
भोजन में अलग-अलग प्रकार की सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज शामिल करें।

ध्यान रखें

रसोई में मौजूद कोई एक सामान्य चीज अपने-आप कैंसर का कारण नहीं बनती। कैंसर का खतरा कई अलग-अलग कारणों पर निर्भर करता है। इसलिए डरने की बजाय भोजन को सही तरीके से रखने, पकाने और संतुलित आहार लेने पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।


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Content Writer

Vandana

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