स्टेंट लगवाने के बाद भी आ सकता है हार्ट अटैक? किन गलतियों से बढ़ जाता है दोबारा खतरा
punjabkesari.in Saturday, Jul 18, 2026 - 03:49 PM (IST)
नारी डेस्क: हार्ट अटैक के बाद कई मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्टर एंजियोप्लास्टी के जरिए स्टेंट लगाते हैं। स्टेंट बंद या संकरी हुई कोरोनरी धमनी को खोलने का काम करता है, जिससे हृदय तक रक्त का प्रवाह सामान्य हो जाता है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह धारणा बन जाती है कि एक बार स्टेंट लग जाने के बाद उन्हें दोबारा कभी हार्ट अटैक नहीं आएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। स्टेंट केवल उस धमनी की रुकावट को दूर करता है, जहां ब्लॉकेज मौजूद होती है। लेकिन शरीर में नई जगहों पर ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया जारी रह सकती है। ऐसे में अगर जीवनशैली और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया जाए तो भविष्य में फिर से हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है।
क्या स्टेंट हार्ट अटैक से पूरी तरह बचा सकता है
डॉक्टरों के अनुसार, स्टेंट हार्ट अटैक के इलाज का एक अहम हिस्सा है, लेकिन यह भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक की पूरी गारंटी नहीं देता। स्टेंट का काम प्रभावित धमनी को खोलना और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाना होता है। लेकिन हृदय रोग की मुख्य वजह, यानी धमनियों में प्लाक और कोलेस्ट्रॉल जमा होने की प्रक्रिया (एथेरोस्क्लेरोसिस), शरीर की अन्य धमनियों में भी जारी रह सकती है। यही कारण है कि स्टेंट लगवाने के बाद भी मरीज को अपनी सेहत का पहले की तरह ही ध्यान रखना पड़ता है।

स्टेंट के बाद भी क्यों आ सकता है हार्ट अटैक
दूसरी धमनियों में नई ब्लॉकेज बनना
स्टेंट सिर्फ उसी धमनी का इलाज करता है जिसमें पहले से रुकावट थी। समय के साथ दूसरी कोरोनरी धमनियों में भी कोलेस्ट्रॉल और प्लाक जमा हो सकते हैं, जिससे भविष्य में नई ब्लॉकेज बन सकती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
स्टेंट के अंदर दोबारा संकुचन
कुछ मामलों में स्टेंट के अंदर अतिरिक्त टिश्यू बनने लगता है, जिससे धमनी फिर से संकरी हो सकती है। आधुनिक ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट में यह जोखिम पहले की तुलना में काफी कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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स्टेंट में खून का थक्का बनना
अगर मरीज डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीप्लेटलेट दवाएं समय पर नहीं लेता या इलाज में लापरवाही करता है, तो स्टेंट के भीतर खून का थक्का बन सकता है। यह स्थिति बेहद गंभीर होती है और अचानक हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।
पुरानी बीमारियों पर नियंत्रण न होना
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और धूम्रपान जैसी समस्याएं स्टेंट लगने के बाद भी हृदय को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। यदि इन पर नियंत्रण नहीं रखा जाए तो दोबारा हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।

ये गलतियां बढ़ा सकती हैं दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम
धूम्रपान जारी रखना
सिगरेट और तंबाकू में मौजूद निकोटीन धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और नई ब्लॉकेज बनने की संभावना बढ़ा देता है। स्टेंट लगने के बाद भी धूम्रपान जारी रखना सबसे बड़ी गलतियों में से एक माना जाता है।
दवाएं समय पर न लेना
कई मरीज कुछ महीनों बाद खुद ही दवाएं बंद कर देते हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करने से स्टेंट में थक्का बनने का खतरा बढ़ सकता है।
खानपान में लापरवाही
अधिक तला-भुना भोजन, जंक फूड, ज्यादा नमक और मीठे पेय पदार्थ लगातार खाने से कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर बढ़ सकती है। इससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
शारीरिक गतिविधि से दूरी
अगर स्टेंट लगने के बाद मरीज बिल्कुल सक्रिय नहीं रहता और नियमित व्यायाम से बचता है, तो मोटापा और अन्य जोखिम कारक बढ़ सकते हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि और नियमित वॉक करना फायदेमंद माना जाता है।
नियमित जांच न कराना
स्टेंट लगने के बाद समय-समय पर कार्डियोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी होता है। इससे किसी भी नई समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

स्टेंट लगने के बाद कैसे रखें दिल का ख्याल
स्टेंट लगने के बाद स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी कदम है। संतुलित आहार लें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं, वजन नियंत्रित रखें, रोजाना व्यायाम करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लें। साथ ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराते रहें।

