किस उम्र में बढ़ने लगता है Cancer का खतरा! जान बचाने के लिए कब कराने चाहिए टेस्ट
punjabkesari.in Thursday, Jul 09, 2026 - 12:21 PM (IST)
नारी डेस्क : कैंसर दुनिया की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। यह बीमारी अक्सर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में धीरे-धीरे विकसित होती रहती है। यही कारण है कि कई लोगों में इसका पता तब चलता है, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। हालांकि, अगर समय पर सही स्क्रीनिंग टेस्ट कराए जाएं तो कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता लगाकर इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ाई जा सकती है। आइए जानते हैं कि किस उम्र के बाद कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है और किन लोगों को कौन-से टेस्ट कराने चाहिए।
किस उम्र में बढ़ने लगता है कैंसर का खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ इसका जोखिम भी बढ़ता जाता है।
30 वर्ष तक: इस उम्र में कैंसर के मामले अपेक्षाकृत कम होते हैं। हालांकि यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है या किसी आनुवंशिक बीमारी का जोखिम है, तो कम उम्र में भी कैंसर हो सकता है।
40 वर्ष के बाद: इस उम्र के बाद ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और कुछ अन्य कैंसर का खतरा बढ़ने लगता है। इसलिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार नियमित स्क्रीनिंग की सलाह देते हैं।
50 वर्ष के बाद: ज्यादातर कैंसर के मामले 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र में सामने आते हैं। इस आयु वर्ग में फेफड़ों, प्रोस्टेट, लिवर, कोलोरेक्टल और ब्लड कैंसर का जोखिम अधिक देखा जाता है।

समय पर स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी?
कैंसर की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
समय पर जांच से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है।
शुरुआती स्टेज में इलाज अधिक प्रभावी और अपेक्षाकृत आसान होता है।
देर से पता चलने पर इलाज लंबा, जटिल और महंगा हो सकता है।
नियमित स्क्रीनिंग से कई प्रकार के कैंसर का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
यें भी पढ़ें : बड़े ब्रेस्ट वाली महिलाओं में आम हैं ये 4 परेशानियां, जानें कारण
किसे कौन-सा टेस्ट कराना चाहिए?
ब्रेस्ट कैंसर: 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार हर 1-2 वर्ष में मैमोग्राफी (Mammography) करानी चाहिए। यदि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है तो स्क्रीनिंग पहले शुरू करने की सलाह दी जा सकती है।
सर्वाइकल कैंसर: 21 से 29 वर्ष की महिलाओं के लिए नियमित पैप स्मीयर (Pap Smear) की सलाह दी जाती है। 30 से 65 वर्ष की उम्र में डॉक्टर की सलाह के अनुसार HPV टेस्ट के साथ या बिना नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए।

कोलोरेक्टल (कोलन) कैंसर: सामान्य जोखिम वाले पुरुषों और महिलाओं को 45 वर्ष की उम्र से कोलोनोस्कोपी या अन्य स्क्रीनिंग टेस्ट शुरू कराने की सलाह दी जाती है।
प्रोस्टेट कैंसर: 50 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों को डॉक्टर से सलाह लेकर PSA ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर अन्य जांच करानी चाहिए। यदि परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास है तो जांच पहले भी शुरू हो सकती है।
फेफड़ों का कैंसर: जो लोग लंबे समय से धूम्रपान करते हैं या पहले कर चुके हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर लो-डोज CT स्कैन कराया जा सकता है। इसकी जरूरत उम्र और धूम्रपान के इतिहास पर निर्भर करती है।
यें भी पढ़ें : Urine में दिख रहे हैं झाग तो तुरंत इन चीजों से बना ले दूरी
कैंसर से बचाव के आसान उपाय
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
शराब का सेवन सीमित रखें या न करें।
हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लें।
रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
वजन को नियंत्रित रखें।
पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंग कराएं।

डॉक्टर क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 वर्ष के बाद इसका खतरा बढ़ने लगता है। इसलिए बढ़ती उम्र के साथ नियमित हेल्थ चेकअप और जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट कराना बेहद जरूरी है। यदि कैंसर का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और समय पर जांच करवाकर इस गंभीर बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

