World Lung Cancer Day: सिर्फ सिगरेट ही नहीं, रोज की ये आदतें भी बढ़ाती हैं Lung cancer का खतरा
punjabkesari.in Saturday, Aug 01, 2026 - 01:05 PM (IST)
नारी डेस्क: हर साल 1 अगस्त को दुनियाभर में विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस (World Lung Cancer Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को फेफड़ों के कैंसर के कारणों, शुरुआती लक्षणों, बचाव के उपायों और समय पर जांच की अहमियत के बारे में जागरूक करना होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन अधिकांश लोग शुरुआती संकेतों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
दुनियाभर में फेफड़ों का कैंसर आज भी कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 18 लाख से अधिक लोगों की मौत इस बीमारी के कारण होती है। पहले यह माना जाता था कि फेफड़ों का कैंसर केवल धूम्रपान करने वालों को होता है, लेकिन अब चिकित्सा विशेषज्ञों के सामने ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जिनमें मरीजों ने कभी सिगरेट, बीड़ी या किसी भी प्रकार के तंबाकू का सेवन नहीं किया, फिर भी वे इस बीमारी की चपेट में आ गए।
फेफड़ों का कैंसर कैसे विकसित होता है
फेफड़ों का कैंसर तब शुरू होता है, जब फेफड़ों की कुछ कोशिकाएं असामान्य रूप से तेजी से बढ़ने लगती हैं। धीरे-धीरे शरीर का इन कोशिकाओं पर नियंत्रण खत्म होने लगता है और वे ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यही कैंसर शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकता है। यही वजह है कि शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेना कई बार गंभीर साबित हो सकता है।

इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें
फेफड़ों का कैंसर शुरुआती दौर में कई बार सामान्य श्वसन संबंधी समस्याओं जैसा महसूस हो सकता है। हालांकि कुछ ऐसे संकेत हैं, जो लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई सप्ताह तक लगातार खांसी रहना, खांसी के साथ खून आना, सांस लेने में तकलीफ होना, सीने में लगातार दर्द महसूस होना, आवाज का बैठ जाना, बिना किसी स्पष्ट कारण तेजी से वजन कम होना और हर समय थकान महसूस होना फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख लक्षणों में गिने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें सामान्य संक्रमण या मौसम का असर मानकर टालना ठीक नहीं है।
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सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, ये कारण भी बढ़ा सकते हैं खतरा
हालांकि धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है। आज के समय में कई ऐसी रोजमर्रा की आदतें और पर्यावरणीय परिस्थितियां भी इस बीमारी का खतरा बढ़ा रही हैं। घरों में लगातार अगरबत्ती जलाना, मच्छर भगाने वाली कॉयल का नियमित इस्तेमाल, कोयले पर बनने वाले खाने के धुएं के संपर्क में लंबे समय तक रहना, वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं तथा बढ़ता वायु प्रदूषण भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों की कोशिकाओं पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से अब ऐसे लोगों में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सिगरेट से दूरी बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आसपास के प्रदूषण और हानिकारक धुएं से भी खुद को बचाना जरूरी है।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है
जिन लोगों का कार्यस्थल धूल, धुएं या रसायनों के संपर्क में रहता है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा जिनके परिवार में पहले किसी सदस्य को फेफड़ों का कैंसर हो चुका है, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोगों के लिए भी समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना फायदेमंद हो सकता है।
फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाना जरूरी है। इसके साथ ही घर और कार्यस्थल पर साफ हवा और पर्याप्त वेंटिलेशन का ध्यान रखना चाहिए, ताकि धुआं और प्रदूषित हवा लंबे समय तक अंदर न रुके। अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉयल और अन्य धुआं पैदा करने वाले उत्पादों का सीमित उपयोग करें। यदि किसी कारणवश इनका इस्तेमाल करना पड़े, तो कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन सुनिश्चित करें। प्रदूषण वाले इलाकों में बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता का मास्क पहनना फायदेमंद हो सकता है। साथ ही रोजाना नियमित व्यायाम, तेज चाल से पैदल चलना और गहरी सांस लेने वाले योग एवं प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करना फेफड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करता है। संतुलित और पौष्टिक भोजन भी फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त आहार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है।

यदि लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या खांसी के साथ खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराएं। समय पर की गई जांच और सही इलाज कई मामलों में बीमारी को गंभीर होने से रोक सकता है।

