12 अगस्त को अमावस्या और सूर्य ग्रहण का संयोग, पूजा करें या लगेगा सूतक? जानें क्या हैं सही नियम
punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 02:59 PM (IST)
नारी डेस्क: 12 अगस्त 2026 को श्रावण अमावस्या पड़ रही है, जिसे उत्तर भारत में हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन पितरों के स्मरण, स्नान-दान, शिव पूजा और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं के लिए खास माना जाता है। इस बार इसी दिन सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है, इसलिए लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमावस्या की पूजा और तर्पण किया जाए या ग्रहण के सूतक का पालन किया जाए?
12 अगस्त को कितने बजे से है अमावस्या
पंचांग के अनुसार 12 अगस्त को श्रावण कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रहेगी। अमावस्या तिथि 12 अगस्त की रात 1:52 बजे शुरू होकर रात 11:06 बजे समाप्त होगी। स्थान के अनुसार पंचांग के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। यही वजह है कि स्नान, दान, पितृ तर्पण और अमावस्या से जुड़े धार्मिक कार्य 12 अगस्त को किए जा सकते हैं।

हरियाली अमावस्या क्यों है खास
श्रावण मास में पड़ने वाली अमावस्या को उत्तर भारत में हरियाली अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ प्रकृति और पेड़-पौधों से जुड़ी परंपराओं के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई जगहों पर इस दिन पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता में इसे केवल पूजा का दिन नहीं माना जाता, बल्कि अपने जीवन और आसपास के वातावरण को बेहतर बनाने का संकल्प लेने का अवसर भी माना जाता है।
पितरों के लिए जरूर करें तर्पण
अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण और तर्पण करने की परंपरा है। सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ जल में काले तिल मिलाकर पितरों का ध्यान करते हुए जल अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, अनाज, कपड़े या दक्षिणा देना भी शुभ माना जाता है। अगर आपके परिवार में तर्पण या श्राद्ध की कोई विशेष परंपरा है, तो उसी के अनुसार विधि अपनाना बेहतर रहेगा।
शिव पूजा का भी है विशेष महत्व
चूंकि यह अमावस्या सावन महीने में पड़ रही है, इसलिए भगवान शिव की पूजा को भी विशेष महत्व दिया जाता है। सुबह शिवलिंग पर साफ जल चढ़ाकर बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर सकते हैं। पूजा के दौरान बड़ी-बड़ी इच्छाओं की सूची बनाने के बजाय अपने जीवन में किसी एक अच्छी आदत को अपनाने या किसी गलत आदत को छोड़ने का संकल्प लेना भी इस दिन को सार्थक बना सकता है।
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धन से जुड़ी परेशानी है तो क्या करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या के दिन घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण किया जा सकता है। इसके साथ ही किसी जरूरतमंद की मदद करना भी अच्छा माना जाता है। हालांकि धन संबंधी उपायों को केवल चमत्कार की उम्मीद से नहीं जोड़ना चाहिए। इस दिन फिजूलखर्ची रोकने, बचत शुरू करने या पुराने कर्ज को व्यवस्थित करने जैसा कोई व्यावहारिक संकल्प लेना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
हरियाली अमावस्या पर पौधा लगाना शुभ
हरियाली अमावस्या का संबंध प्रकृति से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में इस दिन नीम, पीपल, बरगद, आंवला, बेल या स्थानीय वातावरण के अनुकूल कोई पौधा लगाया जा सकता है। लेकिन केवल पौधा लगाकर तस्वीर खिंचवाना ही पर्याप्त नहीं है। उसकी नियमित देखभाल करना और उसे बड़ा होने तक सुरक्षित रखना इस परंपरा की असली भावना है।
अब सबसे बड़ा सवाल- सूर्य ग्रहण का सूतक लगेगा या नहीं
12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भी हो रहा है, लेकिन भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में इसे लेकर सूतक की मान्यता को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराएं हो सकती हैं। सामान्य तौर पर सूतक का विचार ग्रहण की दृश्यता और स्थानीय पंचांग परंपरा से जोड़ा जाता है। इसलिए भारत में रहने वाले लोग किसी अफवाह या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर डरने के बजाय अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर की परंपरा के अनुसार निर्णय लें। विदेश में रहने वालों को अपने स्थान के अनुसार ग्रहण की दृश्यता और संबंधित धार्मिक नियम देखने चाहिए।

अमावस्या पर किन बातों से बचें
अमावस्या के दिन धार्मिक मान्यता के अनुसार नशे, मांसाहार, अनावश्यक विवाद और किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है। पितरों के नाम पर दिखावा करने के बजाय जरूरतमंद की मदद करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही हर परेशानी को ‘पितृ दोष’ या किसी नकारात्मक शक्ति से जोड़कर डरना भी उचित नहीं है। आर्थिक, पारिवारिक या मानसिक समस्याओं के लिए जरूरत पड़ने पर संबंधित विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है।
शाम को जलाएं दीपक, करें पूर्वजों का स्मरण
शाम के समय घर के मंदिर में दीपक जलाकर कुछ देर शांत बैठ सकते हैं। परिवार के दिवंगत सदस्यों और पूर्वजों को याद करके उनके अच्छे संस्कारों और सीख को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया जा सकता है। आखिरकार अमावस्या की परंपराओं का भाव केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है। पितरों को याद करना अपनी जड़ों के प्रति कृतज्ञता है, शिव पूजा आत्मसंयम का प्रतीक है और पौधा लगाना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को बचाने का संकल्प।
नोट: पूजा, तर्पण और सूतक से जुड़े नियम अलग-अलग संप्रदाय और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग/पंडित की सलाह लेना बेहतर है।

