Supplements लेने का भी है सही तरीका, आयरन-कैल्शियम से लेकर Vitamin D तक के लिए जानें जरूरी बातें
punjabkesari.in Sunday, Aug 09, 2026 - 11:09 AM (IST)
नारी डेस्क: आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो किसी न किसी तरह का न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट न लेता हो। शरीर में विटामिन या मिनरल की कमी पूरी करने के लिए लोग आयरन, कैल्शियम, विटामिन D और मल्टीविटामिन जैसी कई चीजों का इस्तेमाल करते हैं। बाजार में अब इनकी सामान्य दवाओं के साथ-साथ स्लो-रिलीज फॉर्मूलेशन भी उपलब्ध हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या स्लो-रिलीज सप्लीमेंट हमेशा बेहतर होते हैं और इन्हें लेने का सही तरीका क्या है? स्लो-रिलीज सप्लीमेंट इस तरह तैयार किए जाते हैं कि उनमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में एक साथ रिलीज होने के बजाय धीरे-धीरे जारी हों। कुछ मामलों में इससे फायदा मिल सकता है, लेकिन हर व्यक्ति और हर पोषक तत्व के लिए स्लो-रिलीज फॉर्म जरूरी हो, ऐसा नहीं है।
स्लो-रिलीज सप्लीमेंट कब हो सकते हैं फायदेमंद?
कुछ सप्लीमेंट्स में स्लो-रिलीज फॉर्म पेट से जुड़ी परेशानी को कम करने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए आयरन लेने पर कुछ लोगों को पेट में असहजता, भारीपन या दूसरी दिक्कतें महसूस होती हैं। ऐसे मामलों में धीरे-धीरे पोषक तत्व रिलीज होने वाला फॉर्म उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा यह शरीर में किसी पोषक तत्व का स्तर अधिक स्थिर बनाए रखने में भी मदद कर सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि स्लो-रिलीज सप्लीमेंट हर स्थिति में सामान्य फॉर्म से बेहतर हैं। कई मामलों में सामान्य सप्लीमेंट भी उतना ही प्रभावी काम करते हैं। इसलिए कौन-सा फॉर्म लेना है, यह संबंधित पोषक तत्व, सप्लीमेंट लेने की वजह और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए।

सप्लीमेंट्स का अधिकतम फायदा लेने के लिए कैसे करें सेवन?
सप्लीमेंट का सही समय और सही तरीके से सेवन करने पर शरीर में उसका अवशोषण बेहतर हो सकता है। हर विटामिन और मिनरल को एक ही तरीके से लेने की जरूरत नहीं होती। उदाहरण के तौर पर विटामिन D शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होता है, जब इसे ऐसे भोजन के साथ लिया जाए जिसमें कुछ मात्रा में स्वस्थ वसा मौजूद हो। वहीं, आयरन खाली पेट लेने पर बेहतर अवशोषित होता है। इसे विटामिन C के स्रोत के साथ लेना भी इसके अवशोषण में मदद कर सकता है। लेकिन अगर खाली पेट आयरन लेने से पेट खराब होता है या असहजता महसूस होती है, तो इसे भोजन के साथ लिया जा सकता है।
कैल्शियम एक साथ ज्यादा मात्रा में लेने से बचें
कैल्शियम के मामले में भी सप्लीमेंट की मात्रा और समय महत्वपूर्ण है। शरीर एक बार में बहुत अधिक कैल्शियम को उतनी अच्छी तरह अवशोषित नहीं कर पाता। इसलिए जरूरत पड़ने पर इसे छोटी-छोटी मात्रा में लेना अधिक प्रभावी हो सकता है। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि जो स्वस्थ व्यक्ति संतुलित आहार लेते हैं और उनके शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी नहीं है, उन्हें नियमित रूप से सप्लीमेंट लेने की जरूरत आमतौर पर नहीं होती। केवल सप्लीमेंट लेने से ऐसे व्यक्ति की सेहत में अतिरिक्त सुधार हो, यह जरूरी नहीं है।
आयरन लेते समय चाय-कॉफी से बनाएं दूरी
आयरन सप्लीमेंट लेने वालों को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। आयरन के साथ चाय, कॉफी या दूध लेने से इसके अवशोषण पर असर पड़ सकता है। इसी तरह आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट को एक साथ लेने से भी बचना चाहिए। अगर डॉक्टर ने दोनों सप्लीमेंट लेने की सलाह दी है, तो उनके सेवन के समय में अंतर रखा जा सकता है। इससे दोनों पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद मिल सकती है।
Vitamin D और दूसरे सप्लीमेंट्स की डोज न बढ़ाएं
सप्लीमेंट्स के मामले में यह सोचकर अधिक मात्रा लेना सही नहीं है कि इससे शरीर को ज्यादा फायदा होगा। विटामिन D या किसी अन्य सप्लीमेंट की जरूरत से ज्यादा मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना निर्धारित डोज से अधिक सप्लीमेंट लेने से बचना चाहिए। एक साथ कई तरह के सप्लीमेंट लेने वालों को उनके लेबल पर दिए गए ingredients भी जरूर जांचने चाहिए। कई बार अलग-अलग सप्लीमेंट्स में एक ही विटामिन या मिनरल मौजूद होता है। ऐसे में अनजाने में किसी पोषक तत्व की जरूरत से ज्यादा मात्रा शरीर में पहुंच सकती है।

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सप्लीमेंट्स को डाइट का विकल्प न बनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार, सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल संतुलित भोजन की जगह नहीं किया जाना चाहिए। अगर व्यक्ति के आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, पर्याप्त प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व शामिल हैं, तो केवल सप्लीमेंट लेने के लिए उन्हें सामान्य भोजन का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। सप्लीमेंट शुरू करने से पहले यह जानना भी जरूरी है कि वास्तव में शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी है या नहीं। बिना जरूरत लंबे समय तक सप्लीमेंट लेना सही तरीका नहीं माना जाता।
क्या सप्लीमेंट्स जिंदगीभर लेने पड़ते हैं
हर व्यक्ति को सप्लीमेंट्स जीवनभर लेने की जरूरत नहीं होती। कई लोगों को किसी पोषक तत्व की कमी होने पर कुछ समय के लिए सप्लीमेंट दिया जाता है। कमी पूरी होने के बाद डॉक्टर स्थिति के अनुसार इसकी डोज कम कर सकते हैं या इसे बंद करने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों में पोषक तत्वों के अवशोषण से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। सीलिएक डिजीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसी स्थितियों या कुछ प्रकार की गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी के बाद शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। ऐसे मामलों में लंबे समय तक सप्लीमेंट लेने की जरूरत पड़ सकती है।
लेकिन यहां भी सप्लीमेंट अपने मन से जारी रखना सही नहीं है। लंबे समय तक सप्लीमेंट लेने वाले लोगों की नियमित जांच और ब्लड टेस्ट जरूरी हो सकते हैं, ताकि यह पता चलता रहे कि शरीर को कितनी मात्रा में पोषक तत्व की जरूरत है और कहीं जरूरत से ज्यादा मात्रा तो नहीं ली जा रही।

कुल मिलाकर, सप्लीमेंट्स तभी फायदेमंद होते हैं जब उनकी जरूरत, सही मात्रा और सेवन का तरीका व्यक्ति की स्थिति के मुताबिक हो। इसलिए किसी भी सप्लीमेंट को लंबे समय तक लेने या उसकी डोज बढ़ाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

