Alert! देश में BP समेत 168 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल, एक दवा पूरी तरह नकली

punjabkesari.in Wednesday, Apr 22, 2026 - 03:19 PM (IST)

नारी डेस्क: अगर आप या फिर आपके घर में कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह की बीमारी से पीड़ित है और वो दवाई ले रहा है, तो ये खबर सिर्फ आपके लिए है। दरअसल, देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ये खुलासा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की एक रिपोर्ट से हुआ है। मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 168 दवाइयों के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या हाई ब्लड प्रेशर (BP) की दवाईयों की है।

एक दवा निकली पूरी तरह नकली

CDSCO की जारी रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में 168 दवाओं को ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) या घटिया गुणवत्ता वाला पाया है। इन दवाओं को केंद्रीय लैब्स में जांचा गया था, जिनमें 48 दवा सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि राज्य स्तरीय ड्रग टेस्टिंग लैब्स में 120 सैंपल फेल पाए गए। हैरानी की बात ये है कि इनमें से एक दवा पूरी तरह नकली थी। इस दवा का सैंपल बिहार से जुड़ा हुआ था, जिसे किसी अन्य कंपनी के ब्रांड नाम का दुरुपयोग करके बनाया था।

हर महीने होती है जांच

CDSCO की यह जांच हर महीने होती है। इसका मकसद बाजार में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। ड्रग रेगुलेटर के मुताबिक, इस मामले में जांच जारी है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस रिपोर्ट के अनुसार, फेल हुई इन दवाओं में 46 दवाएं हिमाचल प्रदेश की बनी हुई है।

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NSQ क्या होता है?

NSQ यानी ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ का मतलब है कि दवा अपने निर्धारित गुणवत्ता मानकों- जैसे घुलनशीलता (dissolution), मात्रा (assay) या एकरूपता पर खरी नहीं उतरती।

कौन-कौन सी दवाएं शामिल

इस रिपोर्ट के अनुसार, फेल हुई इन दवाओं में रोजमर्रा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं है। जिनमें से बीपी की दवा की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, Clopidogrel-दिल के मरीजों में खून के थक्के रोकने के लिए, Terbutaline- अस्थमा और सांस की बीमारियों में, Ambroxol और Bromhexine - बलगम को पतला करने के लिए दी जाती है, ये दवाएं भी इस लिस्ट में शामिल है।

दवा खरीदते समय बरते सावधानी

CDSCO ने ड्रग अलर्ट जारी किया है। दवाओं को खरीदने समय हमेशा सावधानी बरतें और अपने डॉक्टर से सलाह लेते रहें। नहीं तो मरीज की सेहत के लिए खतरा हो सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि किसी एक बैच के फेल होने का मतलब पूरी दवा का खराब होना नहीं है।  


 


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Content Editor

Pooja Gill

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