शोध का खुलासा, मौत के डर से बढ़ रही है बोतलबंद पानी की डिमांड

Monday, February 5, 2018 3:59 PM
शोध का खुलासा, मौत के डर से बढ़ रही है बोतलबंद पानी की डिमांड

लोग अपनी सेहत के लेकर बहुत फ्रिकमंद रहते हैं। कहीं सफर पर जाना हो तो अपने पास बोतल बंद पानी रखना नहीं भूलते। इसके पीछे का कारण अच्छी सेहत, लोग इसलिए स्वच्छ यानि बोतल बंद पानी पीना पसंद करते हैं ताकि किसी बीमारी के कारण कहीं वे मौत की कागार पर न पहुंच जाएं। हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि मौत के डर से आप प्लास्टिर केन का पानी घर पर मंगवाते या फिर मिनरल वॉटर की बोतलें इस्तेमाल करते हैं वह प्रदूषण को ज्यादा बढावा दे रही हैं। 
कनाडा की यूनिवर्सिटी में शोध के मुताबिक मौत के इसी डर का फायदा उठाकर कंपनियां लोगों को पानी बेचती हैं।
 

यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के सोशल साइकोलॉजी टेरर मैनेजमेंट की थ्योरी के मुताबिक एक रिसर्च किया गया। जिससे यह बात सामने आई कि लोग बोतलबंद पानी इसलिए खरीदते हैं कि उन्हें लगता है इससे कोई खास फायदा होगा लेकिन ऐसा कुछ भी नही है। इस पानी को पैक करने वाली कंपनियां लोगों के इस डर को निशाना बना कर विज्ञापन करते हैं। जिससे पानी से ज्यादा प्लास्टिक की बिक्री हो जाती है। 
 

इसी चिंता को लेकर कुछ लोगों का यह भी कहना है कि नल का पानी पीने के ओर लोगों का झुकाव बढ़ाने की बहुत ज्यादा जरूरत है। इस पर किए गए रिसर्च में कुछ चौकाने वाले आंकड़े भी सामने आए। एक और रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 में सिर्फ कनाडा में लोगों द्वारा 2.4 बिलियन लीटर बोतलबंद पानी खरीदा गया। 2018 तक यह आंकड़ा तीन बिलियन तक जा पहुंचा। इसी तरह साल 2004 में अमेरिका में 26 अरब लीटर पानी को प्लास्टिक की बोतलों में भरने के लिए दो करोड़ बैरल तेल का इस्तेमाल किया गया। पानी बर्बाद होने के अलावा यहीं बोतलें जब कूड़े के ढेर पर पहुंचती हैं तो वातावरण को प्रदूषण के साथ-साथ जमीन के अंदर पानी को भी नुकसान पहुंचा रही हैं। जिसकी सेहत को ज्यादा नुकसान हो रहा है। 


 


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