भारत की बड़ी तैयारी! दुनिया के Top 10 Ports में शामिल होगा वाढवण पोर्ट, गुड्स एक्सपोर्ट को मिलेगी रफ्तार
punjabkesari.in Friday, Feb 06, 2026 - 07:20 PM (IST)
मुंबईः भारत के समुद्री और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने महाराष्ट्र के पालघर ज़िले में प्रस्तावित वधावन पोर्ट के विकास और पोर्ट अवसंरचना विस्तार के लिए 2.2 लाख करोड़ रूपए से अधिक के कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रोजेक्ट 2034 तक पूरा किए जाने का अनुमान है और प्रॉजेक्ट पूर्ण हो जाने के बाद यह पोर्ट दुनिया के शीर्ष 10 पोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। फिलहाल भारत का कोई पोर्ट शीर्ष 20 में भी शामिल नहीं है। भारत का जीएनपीए ग्लोबल रैंकिग में 23वें नंबर पर आता है और दुनिया के शीर्ष 10 पोर्ट्स में से 6 चीन में है। इस प्रॉजेक्ट के पूर्ण होने भारत की ग्लोबल गुड्स एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी भी 2 से बढ़ कर 3 प्रतिशत हो सकती है, इस से पहले 2005 में ग्लोबल गुड्स एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत थी लिहाजा अभी इस दिशा में बहुत काम किए जाने की जरूरत है।

76,220 करोड़ रूपए की है लागत
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने देश की महिला पत्रकारों को इस पोर्ट का दौरा करवाया और इस प्रॉजेक्ट के बारे में जानकारी दी और आने वाले समय में इस पोर्ट के जरिए बढ़ने वाले भारत के प्रभाव के बारे में भी बताया। पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 76,220 करोड़ रूपए है और इसकी प्रस्तावित क्षमता 298 मिलियन टन प्रति वर्ष, जिसमें 9.87 मिलियन टीईयू कंटेनर क्षमता शामिल है।इस प्रॉजेक्ट के प्रमुख समझौतों में अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड के साथ करार शामिल है, जिसके तहत वधावन पोर्ट पर लगभग 26,500 करोड़ रूपए की ऑफशोर परियोजनाएं और 25,000 करोड़ रूपए के कंटेनर टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। वहीं, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ 20,000 करोड़ रूपए का समझौता वधावन पोर्ट परियोजना के लिए वित्तीय सहायता सुनिश्चित करेगा।इसके अलावा, एवरग्रीन मरीन कॉरपोरेशन और गल्फटेनर कंपनी के साथ क्रमशः 10,000 करोड़ रूपए और 4,000 करोड़ रूपए के निवेश के लिए समझौते किए गए हैं, जिनके तहत वाढवण पोर्ट पर आधुनिक टर्मिनलों का विकास किया जाएगा।

इको-फ्रेंडली सिस्टम से बनेगा 100 प्रतिशत ग्रीन पोर्ट
भारत का 13वां प्रमुख पोर्ट, वाढवण महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित दहाणू (वाढवण तट) पर बनाया जा रहा है जिसमें अत्याधुनिक कंटेनर टर्मिनल, हाई-स्पीड कार्गो हैंडलिंग सिस्टम, डिजिटल कस्टम्स क्लियरेंस और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी सुविधाएं उपलब्ध होंगी जिसमें पर्यावरण और भविष्य की सोच को ध्यान में रखते हुए ये पोर्ट 21वीं सदी का स्मार्ट-सस्टेनेबल और 100 प्रतिशत ग्रीन पोर्ट के रूप में विकसित होगा। सोलर एनर्जी, स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट और इको-फ्रेंडली सिस्टम पर खासतौर पर फोक्स रहेगा। प्राकृतिक गहराई के कारण बड़े मालवाहक जहाज आसानी से आ-जा सकते हैं क्योंकि यह हर मौसम में काम करने वाला डीप ड्राफ्ट पोर्ट है।
भारत बनेगा ग्लोबल ट्रेड हब
वाढवण पोर्ट सिर्फ बंदरगाह नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक समुद्री रणनीति का अहम हिस्सा है। यह बड़े कंटेनर जहाजों के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करेगा और भारत को मदर पोर्ट बनाएगा। स्मार्ट टर्मिनल्स और हाई-टेक सिस्टम से पोर्ट टॉप 10 कंटेनर पोर्ट्स में शामिल हो सकता है। भारत के निर्यात और आयात में कम लागत, तेज कस्टम क्लियरेंस और कम ट्रांजिट टाइम मिलेगा। यह पोर्ट महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत को सीधी कनेक्टिविटी देगा। यूरोप, मध्य पूर्व और मध्य एशिया से जुड़कर भारत की ब्लू इकोनॉमी को नई गति मिलेगी।
वाढवण पोर्ट स्किलिंग प्रोग्राम, 12 लाख लोगों को रोजगार
वाढवण पोर्ट प्रोजेक्ट स्थानीय युवाओं के लिए मुफ्त स्किल ट्रेनिंग चला रहा है, जिससे करीब 12 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। व्हाट्सऐप चैटबॉट के जरिए प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और व्हीलर सर्विस टेक्नीशियन जैसे कई कोर्स उपलब्ध हैं।
🛑 As part of the ongoing #MumbaiPressTour, the All Women Journalist Delegation from Chandigarh, Himachal Pradesh, and Punjab explored the Jawaharlal Nehru Port Trust (@JNPort).
— PIB in Maharashtra 🇮🇳 (@PIBMumbai) January 22, 2026
They were briefed by Manisha Jadhav, General Manager, on the port's capacity and toured the… pic.twitter.com/poA6mR1bmg
जेएनपीए-भारत का पहला 100% लैंडलॉर्ड पोर्ट
जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी देश का पहला 100% लैंडलॉर्ड पोर्ट है और विश्व के टॉप 100 कंटेनर पोर्ट्स में 23वें स्थान पर है। यह भारत के कुल कस्टम रेवन्यू में 21% योगदान देता है और कंटेनर यातायात का 54% संभालता है। जेएनपीए की GM श्रीमती मनीषा जाधव और वरिष्ठ अधिकारियों ने पीआईबी चंडीगढ़-मुंबई की टीम द्वारा आमंत्रित महिला पत्रकारों को जेएनपीए और वाढवण पोर्ट प्रोजेक्ट्स, संचालन और मुख्य पहलों के बारे में जानकारी दी। 26 मई 1989 को स्थापित पोर्ट में 5 कंटेनर टर्मिनल और विशेष कार्गो सुविधाएं हैं। 15.5 मीटर गहरे ड्राफ्ट की वजह से 18,000 TEU क्षमता वाले बड़े जहाज आ-जा सकते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में यहाँ 7.30 मिलियन TEUs संचालन और 92.12 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो प्रोसेस हुआ।
TEU कंटेनरों की गिनती की इकाई है, जिसमें 1 TEU = 20 फीट का एक कंटेनर माना जाता है। यह पोर्ट एक साथ 18,000 TEUs यानी 20 फीट के 18,000 कंटेनर ले जाने वाले बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम है।
मेगा पार्किंग प्लाजा, पहला स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन आधारित पोर्ट
जेएनपीए देश का स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन आधारित पोर्ट है जो 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से संचालित होता है। 45 हेक्टेयर में फैले पार्किंग प्लाजा में 2,832 ट्रैक्टर-ट्रेलरों की एक साथ पार्किंग की सुविधा दी गई है जिसका उद्देश्य निर्यात कंटेनरों व्यवस्था, ट्रैफिक कंट्रोल करना है। 24 घंटे कस्टम हाउस, रियल-टाइम पार्किंग सिस्टम, वाई-फाई और ड्राइवरों के लिए डॉरमेट्री, कैंटीन व स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

