ईरान–इजरायल युद्ध से भारत का बासमती चावल संकट में, अरबों का होगा नुकसान

punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 09:38 AM (IST)

नारी डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते मिलिट्री तनाव के बीच भारत से चावल का एक्सपोर्ट खतरे में है, एक्सपोर्टर्स ने ईरान, अफगानिस्तान और कई दूसरे खाड़ी देशों में पेमेंट में देरी और शिपिंग में रुकावटों को लेकर चिंता जताई है।  भारत का लगभग 50% निर्यात पांच पश्चिम एशियाई देशों – सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन को जाता है। शनिवार को अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमला करने के बाद, जिससे इलाके में अस्थिरता बढ़ने और होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग पर रोक लगने का डर पैदा हो गया है। 


जंग का फ्यूल की कीमतों पर असर

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने रविवार को अपने सदस्यों को ईरान और खाड़ी देशों के लिए नए ‘कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट’ (CIF) कमिटमेंट करने से बचने की सलाह दी। इसने चेतावनी दी कि ईरान और संयुक्त अरब अमीरात में हो रहे डेवलपमेंट से बंकर फ्यूल की कीमतों पर तुरंत असर पड़ सकता है और कंटेनर और बल्क वेसल की अवेलेबिलिटी में रुकावट आ सकती है। फेडरेशन ने कहा, “ऐसे हालात में, कंटेनर और बल्क फ्रेट कम समय में तेज़ी से बढ़ सकता है, जिससे एक्सपोर्टर्स को फिक्स्ड डिलीवर-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट पर नुकसान हो सकता है।”


 सबसे बड़ा अनाज एक्सपोर्टर है भारत 

APEDA के डेटा के मुताबिक, बासमती चावल सबसे कमज़ोर सेगमेंट है, जिसमें भारत दुनिया का सबसे बड़ा अनाज एक्सपोर्टर है, जो ग्लोबल प्रोडक्शन का 70% से ज़्यादा हिस्सा रखता है। APEDA ने कहा कि भारत ने 2024-2025 में लगभग ₹50,000 करोड़ कीमत का लगभग छह मिलियन टन बासमती चावल एक्सपोर्ट किया, जिसकी डिमांड मुख्य रूप से पश्चिम एशियाई देशों से आई। पिछले महीने बासमती के होलसेल प्राइस में पहले ही 10-15% की बढ़ोतरी हुई है और ईरान एक अहम मार्केट है, इसलिए फेडरेशन ने कहा कि आने वाले दिनों में प्राइस में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।


पंजाब और हरियाणा पर पड़ेग असर

पंजाब और हरियाणा उन राज्यों में से हैं जिन पर सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा, इन दोनों राज्यों का कुल प्रीमियम एरोमैटिक बासमती अनाज एक्सपोर्ट में लगभग 75% हिस्सा है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, हरियाणा का हिस्सा लगभग 35% है, जबकि पंजाब का एक्सपोर्ट में 40% हिस्सा है। पंजाब में बासमती एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट रंजीत सिंह जोसन ने कहा- "युद्ध की वजह से शिपिंग कंपनियों को अपने कार्गो वेसल वहीं रोकने पड़े हैं, और इन वेसल में लोड किए गए मटीरियल और अनाज की मूवमेंट भी रुक गई है।" उनका मानना ​​है कि अगर लड़ाई लंबी खिंचती है, तो एक्सपोर्टर्स का नुकसान बढ़ेगा और बासमती की प्राइस में गिरावट आएगी, जिसका असर एरोमैटिक अनाज उगाने वालों पर पड़ेगा।
 


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vasudha

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