पढ़ाई के साथ- साथ बच्चों को जरूर दें धार्मिक ज्ञान, उनके साथ रोजाना करें एक छोटा सा काम

punjabkesari.in Wednesday, Mar 25, 2026 - 10:56 AM (IST)

नारी डेस्क:  आज के आधुनिक दौर में जहां बच्चे मोबाइल, इंटरनेट और स्क्रीन की दुनिया में ज्यादा समय बिताते हैं, वहीं कई माता-पिता अब उन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कार, अनुशासन और मानसिक शांति  देने का एक मजबूत तरीका भी है। अगर आप भी अपने बच्चे को समृद्ध और संस्कारी बनाना चाहते हैं, तो उसमें यह एक आदत जरूर डालें । 

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धार्मिक मूल्यों का बच्चों पर होता है ये असर 

हाल ही में इस संबंध में जर्मनी स्थित रूर विश्वविद्यालय बोखुम के विशेषज्ञों ने एक रिपोर्ट पेश की है। विशेषज्ञों ने 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों का डाटा इकट्ठा किया। उन्होंने पाया कि जैसे-जैसे समाज में बच्चों की परवरिश के दौरान धार्मिक आस्था को दी जाने वाली प्राथमिकता कम हुई, वैसे-वैसे बच्चों और किशोरों में चिंता संबंधी विकारों की दर बढ़ती गई। जिन समुदायों में आज भी धार्मिक मूल्यों को महत्व दिया जाता है, वहां बच्चों में तनाव कम होता है। दूसरों के प्रति सहिष्णुता और सेवा भाव विकसित होता है


भारत में बच्चों को धर्म से जोड़ रहे मां-बाप

 प्यू रिसर्च सेंटर की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय माता-पिता अपने बच्चों को धर्म से जोड़ने में बहुत सक्रिय हैं। लगभग 90 फीसदी से अधिक भारतीय माता-पिता का कहना है कि वे अपने बच्चों की परवरिश धार्मिक विश्वास के साथ कर रहे हैं। लगभग 74 फीसदी भारतीय माता-पिता अपने बच्चों को मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या चर्च जैसे पूजा स्थलों पर लेकर जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धर्म बच्चों को जीवन का एक स्पष्ट उद्देश्य, नैतिक मूल्यों के लिए एक ठोस ढांचा और एक ऐसा समुदाय देता है, जिस पर वे संकट के समय भरोसा कर सकें।

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 बच्चों में डालें “रोज़ाना प्रार्थना और कृतज्ञता” की आदत

यह एक छोटी-सी लेकिन बहुत प्रभावशाली आदत है, जो बच्चे के व्यक्तित्व को अंदर से मजबूत बनाती है। रोज़ प्रार्थना करने से बच्चों का मन शांत होता है और उनका ध्यान पढ़ाई में बेहतर लगता है। इससे बच्चे धीरे-धीरे बड़ों का सम्मान करना, सही-गलत समझना और जिम्मेदारी लेना सीखते हैं। जब बच्चा रोज़ “धन्यवाद” कहना सीखता है, तो वह जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को समझने लगता है। प्रार्थना और ध्यान बच्चों के अंदर के तनाव और चिड़चिड़ेपन को कम करते हैं। जब पूरा परिवार साथ में पूजा या प्रार्थना करता है, तो रिश्तों में प्यार और अपनापन बढ़ता है।


बच्चों को इस तरह सिखाएं अच्छी आदत 

 रोज़ 2–5 मिनट की छोटी प्रार्थना करवाएं, कोई सरल मंत्र या “थैंक यू” बोलना सिखाएं। बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं। अगर आप खुद नियमित पूजा या ध्यान करेंगे, तो वे भी अपनाएंगे। उन्हें भजन या कहानी के जरिए सिखाएं, त्योहारों पर उन्हें छोटे-छोटे काम दें। बच्चों पर जबरदस्ती न करें, बल्कि प्यार से समझाएं ताकि वे खुद रुचि लें। ध्यान रखें  धार्मिक शिक्षा का मतलब डर या अंधविश्वास नहीं होना चाहिए, बच्चों को सही सोच और सकारात्मकता सिखाना ज्यादा जरूरी है। बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार देना भी जरूरी हैऔर इसकी शुरुआत एक छोटी-सी रोज़ाना प्रार्थना से हो सकती है। 


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Content Writer

vasudha

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