इस देश में बच्चे को न पढ़ाने पर छिन सकती है कस्टडी! उठा लें जाती है सरकार

punjabkesari.in Tuesday, Apr 14, 2026 - 04:54 PM (IST)

नारी डेस्क : हम देखते है की मां-बाप की लापरवाही कई बार बच्चों का भविष्य खराब कर देते है। या तो अगर बच्चें को नहीं पढ़ाते है। पर बता दें की एक ऐसा देश है, जहां अक्सर ये दावा किया जाता है कि Finland में अगर माता-पिता अपने बच्चे को नहीं पढ़ाते या उसकी ठीक से देखभाल नहीं करते, तो सरकार बच्चे को अपने कब्जे में ले लेती है। यह बात सुनने में भले ही चौंकाने वाली लगे, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग और ज्यादा गंभीर है। कहा जाता है की बच्चें का भविष्य बनाना मां-बाप के हाथ में है।

क्या है “Taking into Care” 

Finland में “Taking into care” नाम की प्रक्रिया होती है, लेकिन यह कोई आम या छोटी वजहों पर लागू नहीं होती। यह कदम तभी उठाया जाता है, जब बच्चे की सुरक्षा, सेहत या जीवन पर खतरा हो। किन परिस्थितियों में लिया जाता है ऐसा फैसला।

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शारीरिक हिंसा (Physical Abuse)

अगर किसी बच्चे के साथ मार-पीट या किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा (Physical Abuse) हो रही हो, तो इसे बेहद गंभीर स्थिति माना जाता है। ऐसे मामलों में सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर सकती है, क्योंकि इससे बच्चे की जान और मानसिक स्वास्थ्य दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। बच्चे को सुरक्षित माहौल देना प्राथमिकता होती है, इसलिए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।

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माता-पिता का नशे में होना

अगर माता-पिता ड्रग्स या शराब के नशे में रहते हैं और इसके कारण बच्चे की सही देखभाल नहीं हो पा रही है, तो इसे एक गंभीर स्थिति माना जाता है। ऐसी हालत में बच्चे की सुरक्षा, पोषण और परवरिश प्रभावित होती है, जिसका उसके शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए इस तरह के मामलों में संबंधित एजेंसियां हस्तक्षेप कर सकती हैं, ताकि बच्चे को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके।

गंभीर लापरवाही (Severe Neglect)

अगर बच्चे को उसकी बुनियादी जरूरतें जैसे पर्याप्त खाना, साफ-सफाई और समय पर मेडिकल केयर नहीं मिल रही हैं, तो इसे गंभीर लापरवाही (Severe Neglect) माना जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे का स्वास्थ्य और विकास दोनों प्रभावित होते हैं, इसलिए संबंधित एजेंसियां हस्तक्षेप कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर उसकी कस्टडी लेकर उसे सुरक्षित माहौल देने का फैसला किया जा सकता है।

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क्या पढ़ाई न कराने पर ही छिन जाती है कस्टडी?

क्या केवल बच्चे को स्कूल न भेजने पर उसकी कस्टडी छिन जाती है? ऐसा नहीं है। सिर्फ पढ़ाई न कराने पर तुरंत यह सख्त कदम नहीं उठाया जाता। कस्टडी तभी ली जाती है जब बच्चे का समग्र विकास खतरे में हो और परिवार को सुधार के कई मौके दिए जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार न आए।

आखिरी विकल्प होता है यह कदम

Finland में बच्चे की कस्टडी लेना एक आखिरी विकल्प के रूप में ही अपनाया जाता है। इससे पहले सोशल वर्कर्स परिवार को समझाते हैं, उन्हें हर तरह की मदद और सपोर्ट देते हैं और स्थिति सुधारने का पूरा मौका दिया जाता है। अगर इन सभी प्रयासों के बाद भी हालात बेहतर नहीं होते और बच्चे की सुरक्षा या भविष्य खतरे में बना रहता है, तभी सरकार यह सख्त कदम उठाती है।

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फिनलैंड में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून जरूर हैं, लेकिन छोटी-छोटी गलतियों पर बच्चे को माता-पिता से अलग नहीं किया जाता। यह कदम सिर्फ तब उठाया जाता है, जब बच्चे की जिंदगी या भविष्य सच में खतरे में हो।


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Monika

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