बोरियत है बच्चों के लिए बहुत जरूरी, तेजी से होगी मेंटल ग्रोथ, जानिए कैसे

punjabkesari.in Thursday, Apr 23, 2026 - 11:39 AM (IST)

नारी डेस्क: आज के समय में बच्चे खेलने-कूदने से ज्यादा मोबाइल फोन चलाना पसंद करते है। हाथ में अगर फोन न हो तो कुछ बच्चे तो खाना भी नहीं खाते। फोन न मिलने पर बच्चे शांत बैठ जाते है या फिर इर्रिटेट होने लगते है। माता-पिता उनकी इस बोरियत को देख कर परेशान हो जाते है और उनके हाथ में फोन थमा देते है। लेकिन, क्या आप जानते है बच्चों के लिए ज्यादा स्क्रीन टाइम कितना खतरनाक है और उनका बोर होना बहुत जरूरी है। खाली बैठना उनके लिए बेहद जरूरी है। चलिए जानते है इस बारे एक्सपर्ट की राय...

क्यों जरूरी है बच्चे का बोर होना?

अगर आपका बच्चा शांत बैठा है तो घबराने की जरूरत नहीं है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि “अपने बच्चों को बोर होने दीजिए!” यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन ‘बोरियत’ (Boredom) असल में बच्चों के मानसिक विकास के लिए एक ‘सुपरफूड’ की तरह काम करती है। बोर होने से बच्चे कुछ न कुछ सोचते है, जिससे उनका मानसिक विकास होता है।

PunjabKesari

डिजिटल नशा कितना खतरनाक

आज के समय में बच्चों से लेकर बड़ो तक हर किसी को डिजिटल नशे की लत लगी हुई है। बच्चे खेलने-कूदने की वजाय फोन पर गेम खेलना ज्यादा पसंद करते है। न्यूरोसाइंटिस्ट्स का मानना है कि स्मार्टफोन और गैजेट्स ‘हाइपर-स्टिमुलेशन’ पैदा करते हैं। जब दिमाग को लगातार डिजिटल उत्तेजना (Stimulation) मिलती रहती है, तो वह सामान्य शांति या खाली समय को सहन नहीं कर पाता।

बोरियत जरूरी होने के मुख्य कारण

‘बोरियत’ असल में मस्तिष्क का एक ‘रीसेट बटन’ है, जो डिजिटल लत के कारण बिगड़े डोपामाइन लेवल को संतुलित करने में मदद करता है।

PunjabKesari

1. रचनात्मकता का विकास: जब बच्चे बोर होते हैं, तो वे अपनी कल्पना का इस्तेमाल करके नए खेल और गतिविधियां खोजते हैं।

2. मानसिक शांति (Mental Rest): लगातार स्क्रीन या गतिविधियों से दिमाग को ब्रेक मिलता है।

3. आत्मनिर्भरता (Independence): बच्चे अपनी बोरियत दूर करने के लिए खुद समाधान ढूंढते हैं, बजाय माता-पिता पर निर्भर रहने के।

4. समस्या समाधान (Problem Solving): बोरियत उन्हें यह सोचने पर मजबूर करती है कि "अब मैं क्या करूँ?"। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Pooja Gill

Related News

static