3 साल में बढ़ता है एक महीना, मलमास में बच्चों को जरूर बचाएं बुरी नजरों से
punjabkesari.in Monday, May 18, 2026 - 05:02 PM (IST)
नारी डेस्क: 17 मई से मलमास शुरू हो गया है। मलमास (जिसे 'अधिक मास' या 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है) हिंदू कैलेंडर में हर तीसरे वर्ष जुड़ने वाला एक तेरहवां अतिरिक्त महीना है। यह चंद्रमा और सूर्य की गति के बीच संतुलन बनाने के लिए होता है। हिंदू धर्म में मलमास के दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस दौरान विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश जैसे सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है।
किसे कहते हैं मलमास
सौर वर्ष 365 दिन और लगभग 06 मिनट का होता है और चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। इस प्रकार सौर और चंद्र दोनों वर्षों में 11 दिन, 1 घंटा, 31 मिनट और 12 सेकंड का अंतराल होता है। जैसे-जैसे यह अंतर हर साल बढ़ता जाता है, यह तीन साल से एक महीने तक चला जाता है, जिसे अधिक मास या मल मास कहा जाता है।
मलमास में बच्चों की नजर उतारने के लिए करें ये उपाय
काला टीका या धागा: बच्चों के माथे, कान के पीछे या पैर के तलवे पर काजल का हल्का टीका लगाएं। बुरी नजर से बचाने के लिए उनके हाथ या पैर में काला धागा भी बांधा जाता है।
नजर बट्टू : बच्चों के पालने (cradle) या उनके कमरे में नजर से बचाने वाला नीला बीड लटकाएं। यह सभी नकारात्मक ऊर्जाओं को सोख लेता है।
नमक का उपाय: एक चुटकी नमक को बच्चे के सिर के ऊपर से 7 बार घड़ी की दिशा में घुमाकर वॉशबेसिन या टॉयलेट में बहा दें। इससे बुरी नजर का प्रभाव खत्म हो जाता है।
हनुमान चालीसा का पाठ: प्रतिदिन बच्चे के पास बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें या हनुमान जी की मूर्ति का थोड़ा सा सिंदूर उनके माथे पर लगाएं।
अधिक मास में पाठ- पूजा का फल
इस मास में दान-पुण्य करने का फल अक्षय होता है, यदि दान संभव न हो तो ब्राह्मणों और संतों की सेवा श्रेष्ठ मानी गई है। इस दौरान दान में खर्च किया गया धन कम नहीं होता। जिस प्रकार एक छोटे से बट के बीज से विशाल वृक्ष उत्पन्न होता है, उसी प्रकार मल मास में किया गया दान सदा फलदायी सिद्ध होता है। इस पूरे महीने में भगवान विष्णु के 'पुरुषोत्तम' रूप की पूजा करें। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

