प्रेग्नेंसी में मॉर्निंग सिकनेस क्यों बढ़ जाती है? खाने की खुशबू से क्यों आती है उल्टी, जानिए वजह

punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 03:33 PM (IST)

 नारी डेस्क: गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में अधिकतर महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या होती है। इसमें सुबह के समय उल्टी, जी मिचलाना, थकान और खाने की खुशबू से बेचैनी महसूस होना आम है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में हो रहे प्राकृतिक बदलावों का असर होता है। इस समय महिला का शरीर नए हार्मोनल बदलावों के साथ तालमेल बिठा रहा होता है, जिससे पाचन तंत्र कमजोर और भावनाएं अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।

वैज्ञानिक नजरिए से मॉर्निंग सिकनेस का कारण

वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो गर्भावस्था के दौरान एचसीजी हार्मोन यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन तेजी से बढ़ता है। यह हार्मोन मस्तिष्क के उस हिस्से को सक्रिय करता है, जो उल्टी और मतली को नियंत्रित करता है। इसके अलावा ब्लड शुगर का कम होना और सूंघने की क्षमता का बढ़ जाना भी मतली को बढ़ा देता है। यही कारण है कि कई महिलाओं को भोजन की खुशबू से भी परेशानी होने लगती है।

मॉर्निंग सिकनेस के आम लक्षण

मॉर्निंग सिकनेस के दौरान सुबह उठते ही उल्टी आना, जी मिचलाना, मुंह में कड़वाहट, चक्कर आना, अत्यधिक थकान, हल्का बुखार जैसा महसूस होना और पेट में जलन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। खाली पेट रहने पर ये लक्षण और अधिक तेज हो सकते हैं। हालांकि अधिकतर मामलों में यह समस्या कुछ समय बाद अपने आप कम हो जाती है।

आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद के अनुसार गर्भावस्था में पित्त दोष बढ़ जाता है और मन अस्थिर हो जाता है। पित्त दोष के बढ़ने से पाचन अग्नि कमजोर होती है, जिससे मतली और उल्टी की समस्या उत्पन्न होती है। आयुर्वेद मानता है कि सही जीवनशैली, संतुलित आहार और घरेलू उपायों से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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अदरक से मिलेगी राहत

आयुर्वेद में अदरक को मॉर्निंग सिकनेस के लिए बेहद प्रभावी माना गया है। सुबह उठते ही हल्का अदरक पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और जी मिचलाने की समस्या कम होती है। कुछ महिलाएं थोड़ी मात्रा में अदरक चबाकर भी राहत महसूस करती हैं।

नींबू और शहद का असर

गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने से भी मॉर्निंग सिकनेस में आराम मिलता है। नींबू पित्त दोष को शांत करता है और शहद शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। हालांकि जिन महिलाओं को पेट में अधिक जलन होती है, उन्हें नींबू का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।

इलायची की खुशबू से आराम

इलायची की खुशबू मतली को तुरंत कम करने में मदद करती है। इलायची चबाने से या इलायची को पानी में उबालकर पीने से राहत मिल सकती है। यह उपाय आसान है और कहीं भी अपनाया जा सकता है।

योग और प्राणायाम की भूमिका

हल्के योग और प्राणायाम अभ्यास मॉर्निंग सिकनेस को कम करने में सहायक होते हैं। धीमी और गहरी सांसें लेना, कुछ मिनट ध्यान करना और मन को शांत रखना पित्त दोष को संतुलित करता है। हालांकि तेज योगासन या झटके देने वाले व्यायाम से बचना चाहिए।

खान-पान में क्या रखें ध्यान

गर्भावस्था के दौरान बहुत तला-भुना, मसालेदार और भारी भोजन करने से बचना चाहिए। दिन में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करना बेहतर होता है। सुबह उठते ही हल्का नाश्ता करने से पेट खाली नहीं रहता और मतली कम होती है। गुनगुना पानी पीना फायदेमंद माना जाता है, जबकि बहुत ठंडा पानी नुकसान पहुंचा सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें

अगर मतली बहुत ज्यादा हो, लगातार उल्टी हो, पेशाब कम आए या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और समय पर इलाज जरूरी होता है।

मानसिक शांति भी है जरूरी तनाव और चिंता से मॉर्निंग सिकनेस की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान मानसिक शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है। शांत संगीत सुनना, गहरी सांसें लेना और आरामदायक माहौल बनाना इस दौरान बहुत मददगार साबित होता है।  


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Content Editor

Priya Yadav

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