यंग कपल्स में भी बढ़ रही फर्टिलिटी की समस्या, एक्सपर्ट्स से जानें वजहें

punjabkesari.in Saturday, Feb 28, 2026 - 03:10 PM (IST)

 नारी डेस्क:  आजकल डॉक्टरों के क्लीनिक में 23 से 29 साल के युवा कपल्स भी कंसीव न कर पाने की शिकायत लेकर आने लगे हैं। पहले फर्टिलिटी की समस्या आमतौर पर 30 या 35 की उम्र के बाद सामने आती थी, लेकिन अब यह आंकड़े कम उम्र में ही देखने को मिल रहे हैं। यह बदलाव मेडिकल एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का विषय बन गया है।

फर्टिलिटी की समस्या अब सिर्फ उम्र तक सीमित नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर 6 में से 1 व्यक्ति जीवन में कभी न कभी इनफर्टिलिटी का सामना करता है। यह दिखाता है कि समस्या अब केवल बढ़ती उम्र तक सीमित नहीं रही। 20s में भी कपल्स को इनफर्टिलिटी की समस्या क्यों हो रही है, इसे एक्सपर्ट्स ने कई कारणों से जोड़ा है।

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लाइफस्टाइल बन रही सबसे बड़ी वजह

फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि बदलती लाइफस्टाइल सबसे बड़ा कारण है। देर रात तक जागना, नींद पूरी न होना, जंक फूड का अधिक सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और बढ़ता मोटापा हार्मोनल संतुलन बिगाड़ रहे हैं।

महिलाओं में ओवुलेशन अनियमित हो जाता है।

पुरुषों में स्पर्म काउंट और क्वालिटी प्रभावित होती है। कई युवा सोचते हैं कि उनकी उम्र कम है, इसलिए समय पर चेकअप नहीं कराते। लेकिन अनहेल्दी रूटीन से समस्या बढ़ रही है।

पुरुष भी प्रभावित हो रहे हैं

इनफर्टिलिटी सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं है। पुरुषों में लो स्पर्म काउंट, कम मूवमेंट और हार्मोनल असंतुलन तेजी से बढ़ रहे हैं। स्मोकिंग, शराब, मोटापा और लंबे समय तक लैपटॉप गोद में रखना स्पर्म हेल्थ को प्रभावित करता है। कुछ रिसर्च के अनुसार लंबे समय तक डिवाइस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का इस्तेमाल भी स्पर्म क्वालिटी पर असर डाल सकता है।

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महिलाओं में बढ़ती हार्मोनल और प्रजनन समस्याएं

कम उम्र में महिलाएं पीसीओएस, थायराइड, एंडोमेट्रियोसिस और पेल्विक इन्फेक्शन जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं। कुछ महिलाओं में एग क्वालिटी कमजोर पाई जा रही है। बायोलॉजिकली हर महिला सीमित संख्या में ओवेरियन रिजर्व के साथ पैदा होती है, जो समय के साथ घटते जाते हैं। खराब लाइफस्टाइल और एनवायरनमेंट इस गिरावट को और तेज कर रहे हैं।

स्ट्रेस का असर भी महत्वपूर्ण

करियर का दबाव, आर्थिक चिंता और सोशल लाइफ से जुड़ा स्ट्रेस शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ा सकता है। महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का लेवल गिर सकता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि फर्टिलिटी ओवरऑल हेल्थ का आईना होती है। आपकी डायट, नींद, स्ट्रेस लेवल और लाइफस्टाइल सीधे प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद।

स्ट्रेस कम करें: मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीकें मदद कर सकती हैं।

समय पर मेडिकल चेकअप कराएं: खासकर अगर 6–12 महीने तक गर्भधारण में दिक्कत हो।

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पुरुषों को भी हेल्दी आदतें अपनानी चाहिए: धूम्रपान और शराब से दूरी, लैपटॉप को गोद में न रखें।

आज के युवा कपल्स में फर्टिलिटी की समस्या बढ़ रही है, लेकिन सही लाइफस्टाइल, मेडिकल सपोर्ट और समय पर चेकअप से इसे कम किया जा सकता है। स्वस्थ शरीर और संतुलित जीवनशैली ही प्रजनन क्षमता बनाए रखने की कुंजी है।   

 


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Content Editor

Priya Yadav

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