ये आदतें बढ़ा रही है Piles का खतरा, क्या कैंसर होने का भी है डर? एक्सपर्ट से जानें

punjabkesari.in Tuesday, Apr 28, 2026 - 01:01 PM (IST)

नारी डेस्क: बवासीर (Piles) गुदा और मलाशय में सूजी हुई नसें हैं, जो कब्ज, पेट के दबाव या खराब जीवनशैली के कारण होती हैं। इसके मुख्य लक्षणों में मल त्याग के समय दर्द, खुजली और खून आना शामिल है। आज के समय में खराब डाइट और कुछ आदतों की वजह से लोग इस समस्या से जूझ रहे है। बवासीर मुख्य रूप से भोजन में फाइबर (Fiber) की कमी के कारण होता है। अगर सही मात्रा में फाइबर नहीं लेते तो इस समस्या का सामना करना पड़ता है। यह समस्या बहुत दर्दनाक है और बहुत से लोग इससे पीड़ित है। इस समस्या से निजात पाने के लिए कुछ आदतों को बदलना पड़ेगा और अच्छी डाइट और सही जानकारी, समय पर देखभाल से इस समस्या को काफी हद तक रोका और कंट्रोल किया जा सकता है। वहीं, कुछ लोगों के मन में इस बीमारी को लेकर कई सवाल होंगे, जैसे कि क्या इस समस्या से कैंसर होने का भी खतरा है। तो आज हम बताएंगे कि एक्सपर्ट का इस बारे में क्या कहना है? इसे कैसे बचा जा सकता है...

किन आदतों से बढ़ रही ये बीमारी?

खानपान की गलत आदतों के कारण जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है उन्हें पाइल्स होने की संभावना अधिक रहती है। इसके साथ ही जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, ऑफिस में डेस्क जॉब करते हैं या जिनकी लाइफस्टाइल सही नहीं उन्हें भी पाइल्स हो सकता है।

बवासीर के कारण

बवासीर होने के कई कारण है। जैसे, लंबे समय तक कब्ज (Constipation), टॉयलेट में ज्यादा देर बैठना, फाइबर की कमी वाला खाना, पानी कम पीना, मोटापा. प्रेग्नेंसी के दौरान दबाव बढ़ना, लंबे समय तक बैठे रहना (Sedentary lifestyle) आदि इस समस्या के होने के कारण है।

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बवासीर के दो प्रकार होते है

आंतरिक बवासीर (Internal Piles): गुदा के अंदर होता है, अक्सर बिना दर्द के खून आ सकता है। 
बाहरी बवासीर (External Piles): गुदा के बाहर होता है, इसमें दर्द और सूजन ज्यादा होती है।

क्या पाइल्स से कैंसर हो सकता है?

एक्सपर्ट के अनुसार, बवासीर की बीमारी से कैंसर नहीं हो सकता। लेकिन, इसके लक्षण कैंसर की बीमारी से मिलते-जुलते ही है। दोनों स्थितियों में शौच के दौरान खून आ सकता है। मल त्यागते समय अगर बार-बार खून आए, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

कैसे करें बचाव?

पाइल्स की समस्या से परेशान लोगों को अपना लाइफस्टाइल बदलना होगा। उन्हें अपनी डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। फल, हरी सब्जियां, दालें, ओट्स और साबुत अनाज खाएं। फाइबर मल को नरम बनाता है और आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। इसके साथ ही ज्यादा मात्रा में पानी पीएं। शौच को कभी न रोकें, जोर लगाकर मल त्याग न करें, ज्यादा देर तक टॉयलेट में न बैठें, टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल न करें, जरूरत हो तो फुटस्टूल का उपयोग करें। हर रोज योग करें। रोज 20–30 मिनट टहलें। इससे पाचन सही रहता है और कब्ज नहीं होता। मोटापा भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। इससे बचने के लिए 
वजन कम करें। ज्यादा समय बैठे न रहे।  


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Content Editor

Pooja Gill

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