क्या छूने या मरीज के संपर्क में आने से फैलता है Hantavirus? एक्सपर्ट ने बता दी हर डिटेल
punjabkesari.in Thursday, May 21, 2026 - 10:39 AM (IST)
नारी डेस्क: हंता वायरस को लेकर इन दिनों लोगों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। कई लोग इसे कोरोना वायरस की तरह खतरनाक मान रहे हैं और यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यह बीमारी भी एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकती है। खासतौर पर हाल ही में एक लग्जरी क्रूज शिप पर सामने आए मामलों के बाद इस वायरस को लेकर डर और बढ़ गया है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर हंता वायरस क्या है, यह कैसे फैलता है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
क्यों चर्चा में आया हंता वायरस?
हाल ही में डच झंडे वाले एक लग्जरी क्रूज शिप पर रहस्यमयी सांस संबंधी बीमारी के मामले सामने आए थे। जांच के बाद कुछ लोगों में हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज पर अब तक 8 लोग संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें से 5 में हंता वायरस की पुष्टि हुई है। वहीं तीन लोगों की मौत होने की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसी घटना के बाद सोशल मीडिया और लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठने लगा कि क्या हंता वायरस भी कोरोना की तरह तेजी से फैल सकता है।

क्या छूने से फैल सकता है हंता वायरस?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हंता वायरस सामान्य संपर्क से नहीं फैलता। यानी किसी संक्रमित व्यक्ति के पास बैठने, हाथ मिलाने या छूने भर से यह वायरस दूसरे इंसान तक नहीं पहुंचता। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और उनके मल-मूत्र के संपर्क में आने से फैलता है। अगर किसी जगह पर चूहों का यूरिन या मल मौजूद हो और व्यक्ति वहां हाथ लगाने के बाद आंख, नाक या मुंह को छू ले, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
कैसे फैलता है यह वायरस?
डॉक्टरों के मुताबिक, हंता वायरस संक्रमित चूहों के जरिए फैलने वाली बीमारी है। चूहों के मल, मूत्र और लार में वायरस मौजूद हो सकता है। कई बार बंद कमरों या गंदी जगहों की सफाई के दौरान वायरस के कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। इसके अलावा संक्रमित चूहे के काटने से भी यह बीमारी फैल सकती है। इसलिए जिन जगहों पर चूहों की संख्या ज्यादा हो, वहां विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
शरीर पर कितना खतरनाक असर डालता है?
हंता वायरस फेफड़ों पर गंभीर असर डाल सकता है। यह बीमारी हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम के रूप में सामने आती है, जिसमें मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कुछ मामलों में फेफड़ों में पानी भरने जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है, जो जानलेवा भी साबित हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह वायरस किडनी को भी प्रभावित कर सकता है।
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क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण?
इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं। मरीज को थकान, बुखार, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। इसके बाद सांस फूलना, सीने में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि कई बार लोग इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
क्या इसका कोई इलाज मौजूद है?
फिलहाल हंता वायरस के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज को सपोर्टिव केयर दी जाती है ताकि शरीर संक्रमण से लड़ सके और गंभीर स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। समय पर इलाज मिलने से मरीज की हालत को बिगड़ने से रोका जा सकता है।

बचाव के लिए क्या करें?
हंता वायरस से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। घर और आसपास चूहों को आने से रोकें और उन जगहों की सफाई करते समय सावधानी बरतें जहां चूहों का मल-मूत्र हो सकता है। अगर किसी बंद कमरे या स्टोर रूम की सफाई करनी हो, तो मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल करें। बिना सुरक्षा के संक्रमित जगहों को छूने से बचें।
घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हंता वायरस को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूर जरूरी है। क्योंकि यह वायरस सामान्य संपर्क से नहीं फैलता, इसलिए कोरोना जैसी महामारी की आशंका फिलहाल नहीं मानी जा रही है। हालांकि साफ-सफाई, सही जानकारी और समय पर इलाज से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

