गाय बचाने के नाम पर फैला जहर का कहर, कुत्तों की मौत के बाद 25 गिद्धों की भी गई जान
punjabkesari.in Saturday, Jun 13, 2026 - 06:22 PM (IST)
नारी डेस्क: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है। यहां कुत्तों को भगाने या मारने के लिए खेतों में जहरीला चावल रखा गया था, लेकिन यह कदम एक बड़े पर्यावरणीय हादसे में बदल गया। पहले कुत्तों की मौत हुई और फिर उनके शव खाने से करीब 25 गिद्धों की भी जान चली गई। जानकारी के मुताबिक, कुछ ग्रामीणों ने अपने खेतों में जहरीला चावल डाल दिया था, ताकि आवारा कुत्तों को रोका जा सके। यह चावल कुत्तों ने खा लिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। शुरुआती जांच में मामला रहस्यमय लग रहा था, लेकिन बाद में सच सामने आया।
कुत्तों की मौत के बाद कैसे फैला जहर का चक्र
मृत कुत्तों के शव खेत में ही पड़े रहे। इन्हीं शवों को खाने के लिए गिद्ध वहां पहुंच गए। गिद्ध, जो आमतौर पर मृत जानवरों को खाकर पर्यावरण को साफ रखने का काम करते हैं, इस बार जहर का शिकार बन गए। धीरे-धीरे करीब 25 गिद्धों की मौत हो गई, जिससे पूरा इलाका दहल उठा।
वन विभाग की जांच में क्या खुलासा हुआ
वन विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया कि यह मामला प्राकृतिक मौत का नहीं था, बल्कि जहरीले पदार्थ के इस्तेमाल का नतीजा था। माना जा रहा है कि यह जहर जानवरों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से खेतों में डाला गया था, लेकिन इसका असर अप्रत्याशित रूप से गिद्धों तक पहुंच गया।
वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें खेत में कई गिद्ध मृत अवस्था में पड़े दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन और वन विभाग तुरंत हरकत में आ गए और मामले की जांच तेज कर दी गई है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने जताई चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। वे मृत जानवरों को खाकर बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। ऐसे में उनकी बड़ी संख्या में मौत होना एक गंभीर पर्यावरणीय चेतावनी है।
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई है। कई यूजर्स ने इसे “लापरवाही का खतरनाक नतीजा” बताया है और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं कुछ लोगों ने लिखा कि जानवरों को इस तरह जहर देना बेहद अमानवीय है। यह घटना न सिर्फ इंसानी लापरवाही को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि छोटे से कदम का असर पूरे पर्यावरण पर कितना बड़ा हो सकता है।

