सावन का महीना भगवान शिव को क्यों है सबसे प्रिय? जानिए व्रत की महिमा
punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 11:25 AM (IST)
नारी डेस्क: हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इस पूरे महीने शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं, रुद्राभिषेक कराते हैं और सोमवार का व्रत रखकर उनकी कृपा पाने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव आराधना का फल कई गुना अधिक मिलता है।
माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है सावन की विशेष महिमा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमान सहन न कर पाने के कारण आत्मदाह कर लिया था। आत्मदाह से पहले उन्होंने संकल्प लिया था कि हर जन्म में भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में प्राप्त करेंगी। इसके बाद उन्होंने हिमालयराज के घर माता पार्वती के रूप में जन्म लिया। कहा जाता है कि सावन के महीने में ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या और व्रत किए थे। उनकी अटूट भक्ति और कठिन साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि आज भी अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए सावन सोमवार का व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं।

समुद्र मंथन और नीलकंठ बनने की कथा भी जुड़ी है सावन से
सावन की महिमा का एक महत्वपूर्ण कारण समुद्र मंथन की कथा भी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले कालकूट नामक विष निकला था। उस विष की अग्नि से संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई थी। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष का पान कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और तभी से वे नीलकंठ कहलाए। कहा जाता है कि विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर लगातार जल अर्पित किया। इसी मान्यता के चलते सावन के पूरे महीने शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है।
सावन में भगवान शिव की कृपा जल्दी क्यों मिलती है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि में सृष्टि के संचालन और भक्तों की रक्षा का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। इसलिए माना जाता है कि सावन में भगवान शिव विशेष रूप से अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं और सच्चे मन से की गई पूजा से शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यही कारण है कि इस महीने में शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और शिव चालीसा के पाठ का विशेष महत्व बताया गया है।
सावन सोमवार व्रत का धार्मिक महत्व
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है, जिसे सावन सोमवार कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और व्रत करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आने की मान्यता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रावण मास के पहले सोमवार से कार्तिक अमावस्या तक रोटक व्रत करने का भी विधान बताया गया है। नारद पुराण में उल्लेख मिलता है कि इस अवधि में भगवान शिव के सोमेश्वर स्वरूप की पूजा करने से धन, वैभव और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। इसे अर्थ सिद्धि प्रदान करने वाला व्रत भी कहा गया है।

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सोमवार को भगवान शिव की पूजा क्यों होती है
सोमवार का दिन भगवान शिव और चंद्रदेव दोनों को समर्पित माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने के साथ व्रत रखने से मानसिक तनाव, पारिवारिक परेशानियां और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। सावन सोमवार के दिन व्रत कथा सुनने और शिव मंत्रों का जाप करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है।
सावन में दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता है कि श्रावण मास में किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, जल, फल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि सावन में किया गया पुण्य कार्य बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान फल प्रदान करता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है सावन का व्रत
धार्मिक महत्व के साथ-साथ सावन सोमवार का व्रत स्वास्थ्य के लिहाज से भी उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर हो जाती है। ऐसे समय में हल्का, सात्विक और आसानी से पचने वाला भोजन शरीर के लिए अधिक लाभदायक होता है। इसी कारण सावन के दौरान कई लोग मांसाहार से परहेज करते हैं, सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और समय-समय पर उपवास रखते हैं। नियंत्रित भोजन और फलाहार पाचन तंत्र को आराम देने के साथ शरीर को संतुलित रखने में भी मदद करता है।

सावन का महीना केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, संयम और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का भी संदेश देता है। भगवान शिव की आराधना, सावन सोमवार का व्रत, जलाभिषेक, दान-पुण्य और सात्विक जीवनशैली को अपनाकर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। यही वजह है कि श्रावण मास को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है।

