लालबागचा राजा हर साल मस्जिद पर जानें क्यों रुकते हैं? जानें ये खास परंपरा
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 12:00 PM (IST)
नारी डेस्क : मुंबई का Lalbaugcha Raja सिर्फ गणेश भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र नहीं है, बल्कि शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक विविधता की भी मिसाल माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन विसर्जन के दिन होने वाली एक खास परंपरा लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। अनंत चतुर्दशी की शोभायात्रा के दौरान लालबागचा राजा की प्रतिमा भायखला स्थित हिंदुस्तानी मस्जिद के पास कुछ समय के लिए रुकती है। इस दौरान दोनों समुदायों की ओर से आपसी सम्मान और सद्भाव का संदेश देखने को मिलता है।
मस्जिद पर बप्पा का होता है खास स्वागत
अनंत चतुर्दशी के दिन लालबागचा राजा की भव्य विसर्जन यात्रा निकलती है। हजारों-लाखों श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयघोष करते हुए इस यात्रा में शामिल होते हैं। इसी दौरान शोभायात्रा भायखला की हिंदुस्तानी मस्जिद के पास पहुंचने पर एक खास ठहराव होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिद से जुड़े मुस्लिम समुदाय के लोग गणपति की प्रतिमा का फूल-मालाओं से स्वागत करते हैं। इस मौके पर मिठाइयों का आदान-प्रदान भी होता है। यही वजह है कि यह छोटा-सा पड़ाव मुंबई के गणेशोत्सव की सबसे खास तस्वीरों में शामिल हो गया है।

दशकों पुरानी बताई जाती है यह परंपरा
हिंदुस्तानी मस्जिद पर लालबागचा राजा के रुकने की परंपरा कोई नई घटना नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह सिलसिला कई दशकों पहले आपसी सद्भावना के एक सहज भाव से शुरू हुआ और धीरे-धीरे वार्षिक परंपरा बन गया। हालांकि, इसके ठीक किस वर्ष और किस घटना से शुरू होने की स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक स्रोतों में आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे किसी एक व्यक्ति या निश्चित घटना से जोड़कर बताना सही नहीं होगा।
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क्यों खास है लालबागचा राजा?
लालबागचा राजा की स्थापना का इतिहास साल 1934 से जुड़ा है। लालबाग के कोली मछुआरों और स्थानीय व्यापारियों ने स्थायी बाजार की अपनी इच्छा पूरी होने के बाद गणपति की स्थापना की थी। इसी वजह से लालबागचा राजा को ‘नवसाचा गणपति’, यानी मनोकामना पूरी करने वाले गणपति के रूप में भी श्रद्धा से पूजा जाता है। आधिकारिक मंडल के रिकॉर्ड के अनुसार 2025 में यह गणेशोत्सव का 92वां वर्ष था। लालबागचा राजा के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुंबई पहुंचते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में रोजाना 15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का आंकड़ा भी दिया गया है, हालांकि भीड़ का आंकड़ा वर्ष और गणना के तरीके के अनुसार बदल सकता है।

गणपति विसर्जन में दिखता है मुंबई का अलग रंग
अनंत चतुर्दशी पर लालबागचा राजा की विसर्जन यात्रा मुंबई के सबसे बड़े धार्मिक जुलूसों में शामिल होती है। रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बप्पा के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ते हैं। हिंदुस्तानी मस्जिद पर होने वाला यह पड़ाव इस पूरी यात्रा में एक ऐसा क्षण बन जाता है, जहां धार्मिक उत्सव के बीच आपसी सम्मान और भाईचारे की तस्वीर दिखाई देती है। मुंबई जैसे महानगर की पहचान ही इसकी विविधता है। लालबागचा राजा की यह परंपरा उसी विविधता के बीच साथ रहने और एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान करने की भावना को सामने लाती है।

