प्रेगनेंसी में पहली सोनोग्राफी कब करवानी चाहिए? जानें क्यों होती है ये जांच जरूरी
punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 04:03 PM (IST)
नारी डेस्क: प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए जिंदगी का बेहद खास दौर होता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। हार्मोनल बदलाव की वजह से थकान, मतली, उल्टी, भूख में बदलाव और वजन बढ़ने जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। इस पूरे समय मां और बच्चे की सेहत पर नजर रखने के लिए डॉक्टर समय-समय पर चेकअप और जरूरी टेस्ट करवाते हैं। इन्हीं में से एक अहम जांच है अल्ट्रासाउंड। प्रेगनेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड होने वाली मां के लिए काफी खास होता है। लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि पहली सोनोग्राफी कब करानी चाहिए, इसमें डॉक्टर क्या देखते हैं और क्या इस दौरान बच्चे की तस्वीर साफ दिखाई देती है? आइए एक्सपर्ट से जानते हैं इन सवालों के जवाब।
पहली सोनोग्राफी क्यों जरूरी होती है
प्रेगनेंसी का शुरुआती अल्ट्रासाउंड डॉक्टर को गर्भावस्था की स्थिति समझने में मदद करता है।इस जांच में सिर्फ बच्चे को नहीं देखा जाता, बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश की जाती है कि प्रेगनेंसी सही जगह पर है और शुरुआती विकास ठीक तरह से हो रहा है या नहीं।

पहली बार अल्ट्रासाउंड कब होता है
पहला अल्ट्रासाउंड आमतौर पर प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों में किया जाता है। हालांकि, हर महिला के लिए इसका समय एक जैसा नहीं होता। महिला की सेहत, प्रेगनेंसी की स्थिति और किसी तरह की परेशानी या लक्षण के आधार पर डॉक्टर अलग समय पर भी अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं। इसलिए अपनी तरफ से कोई तय समय मानने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार पहली सोनोग्राफी करवाना बेहतर रहता है।
पहली सोनोग्राफी में डॉक्टर क्या देखते हैं
शुरुआती अल्ट्रासाउंड के दौरान डॉक्टर कई जरूरी चीजों की जांच करते हैं। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि प्रेगनेंसी गर्भाशय के अंदर सही जगह पर है या नहीं और गर्भावस्था का विकास सामान्य तरीके से हो रहा है या नहीं।
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इसके अलावा अल्ट्रासाउंड से
प्रेगनेंसी कितने सप्ताह की है, इसका अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। बच्चे की हार्टबीट देखी जा सकती है। शुरुआती विकास का आकलन किया जा सकता है। डिलीवरी की संभावित तारीख तय करने में मदद मिल सकती है। अगर जुड़वा बच्चे हैं तो शुरुआती चरण में इसका पता चल सकता है। गर्भाशय या उसके आसपास किसी असामान्यता के संकेत भी दिखाई दे सकते हैं। अगर जांच के दौरान किसी परेशानी का संकेत मिलता है तो डॉक्टर जरूरत के हिसाब से आगे की जांच या इलाज की सलाह दे सकते हैं।

अल्ट्रासाउंड कैसे किया जाता है
शुरुआती प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है। कुछ मामलों में पेट के ऊपर से अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जबकि कुछ स्थितियों में डॉक्टर ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं। कौन सा तरीका इस्तेमाल करना है, यह प्रेगनेंसी के चरण और डॉक्टर की जरूरत के आकलन पर निर्भर करता है।
क्या पहली सोनोग्राफी में बच्चे की तस्वीर साफ दिखाई देती है
जरूरी नहीं कि पहली सोनोग्राफी में बच्चे की तस्वीर बिल्कुल साफ दिखाई दे। शुरुआती हफ्तों में भ्रूण का आकार बहुत छोटा होता है, इसलिए तस्वीर बाद के अल्ट्रासाउंड से काफी अलग नजर आ सकती है। तस्वीर कितनी स्पष्ट दिखाई देगी, यह प्रेगनेंसी के कितने सप्ताह चल रहे हैं और किस तरह का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है, इन चीजों पर निर्भर करता है। इसलिए पहली सोनोग्राफी में तस्वीर बहुत छोटी या अलग दिखाई दे तो घबराने की जरूरत नहीं है।
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
अगर प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में तेज पेट दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग, चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना जैसी परेशानी हो रही है तो तय तारीख तक अल्ट्रासाउंड का इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। ध्यान रखें कि हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती है। इसलिए पहला अल्ट्रासाउंड कब करवाना है और उसमें किन चीजों की जांच जरूरी है, इसका फैसला आपकी स्थिति के अनुसार डॉक्टर ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं।

