नसों में ब्लॉकेज होने की बड़ी निशानियां, यहां गौर करें नहीं तो देर होगी
punjabkesari.in Monday, Aug 31, 2026 - 08:53 PM (IST)
नारी डेस्कः नसों में ब्लॉकेज की बात आमतौर पर धमनियों (arteries) में जमा होने वाले प्लाक के लिए की जाती है। यह प्लाक मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल, फैटी पदार्थों और अन्य तत्वों से बन सकता है। समय के साथ धमनी की अंदरूनी दीवार संकरी होने लगती है और रक्त का प्रवाह कम हो सकता है। इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहा जाता है।
बढ़ा हुआ LDL कोलेस्ट्रॉलः LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर लंबे समय तक ज्यादा रहने पर यह धमनियों की दीवार में जमा होकर प्लाक बनाने में योगदान कर सकता है। जितना ज्यादा समय तक LDL बढ़ा रहता है, उतना ही धमनियों को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ता है।
हाई ब्लड प्रेशरः लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहना धमनियों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे वहां प्लाक बनने की प्रक्रिया आसान हो सकती है और पहले से मौजूद ब्लॉकेज भी बढ़ सकती है।
धूम्रपान और तंबाकूः सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और एथेरोस्क्लेरोसिस का खतरा बढ़ाते हैं। इसलिए धूम्रपान छोड़ना नसों और हृदय की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
डायबिटीज या हाई ब्लड शुगरः लंबे समय तक ब्लड शुगर ज्यादा रहने से रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता है। डायबिटीज वाले लोगों में हृदय और अन्य धमनियों से जुड़ी बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है।
ज्यादा वजन और पेट की चर्बीः मोटापा, खासकर पेट के आसपास ज्यादा चर्बी, हाई BP, डायबिटीज और खराब कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। ये सभी मिलकर धमनियों में प्लाक बनने का खतरा बढ़ा सकते हैं।
गलत खान-पानः लगातार सैचुरेटेड और ट्रांस फैट, ज्यादा नमक, ज्यादा चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड वाला आहार हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसके विपरीत सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प हैं।
शारीरिक गतिविधि की कमीः लगातार बैठे रहना और व्यायाम न करना वजन, BP, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित कर सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
उम्र और परिवार का इतिहासः उम्र बढ़ने के साथ धमनियों में प्लाक बनने का जोखिम बढ़ता है। अगर परिवार में कम उम्र में हृदय रोग या ब्लॉकेज की समस्या रही है, तो व्यक्ति का जोखिम भी अधिक हो सकता है।
लंबे समय का तनाव और खराब नींदः लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न लेना सीधे तौर पर हर व्यक्ति में ब्लॉकेज का कारण नहीं बनते, लेकिन ये BP, वजन और अन्य हृदय संबंधी जोखिम कारकों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या ब्लॉकेज अचानक बनती है?
आमतौर पर धमनी में प्लाक कई वर्षों में धीरे-धीरे बनता है लेकिन कभी-कभी प्लाक की सतह टूटने पर वहां अचानक खून का थक्का बन सकता है और रक्त प्रवाह तेजी से रुक सकता है। यही स्थिति हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
किन लक्षणों को गंभीरता से लें?
अगर दिल की धमनियों में समस्या है, तो सीने में दबाव या दर्द, चलते समय सांस फूलना, असामान्य थकान, ठंडा पसीना, चक्कर या दर्द का हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक जाना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। महिलाओं और डायबिटीज वाले लोगों में लक्षण कभी-कभी अलग या कम स्पष्ट भी हो सकते हैं।
अगर सीने में तेज या नया दर्द हो, सांस लेने में गंभीर परेशानी हो या हार्ट अटैक जैसे लक्षण अचानक शुरू हों, तो घरेलू या आयुर्वेदिक इलाज आजमाने के बजाय तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लें।
ध्यान रखें: ब्लॉकेज का इलाज उसकी जगह, गंभीरता और व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। केवल किसी घरेलू नुस्खे से ब्लॉकेज “खोलने” का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
नसों की ब्लॉकेज में क्या किया जाता है?
दवाएं: डॉक्टर जरूरत के अनुसार कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा (जैसे statin), ब्लड-थिनिंग/एंटीप्लेटलेट दवा और अन्य दवाएं दे सकते हैं।
डाइट: तला-भुना खाना, ट्रांस फैट, ज्यादा घी-मक्खन और अत्यधिक नमक कम करें। सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स और मछली जैसे हृदय-स्वस्थ खाद्य पदार्थ शामिल करें।
व्यायाम: डॉक्टर की अनुमति से नियमित वॉक और शारीरिक गतिविधि ब्लड वेसल्स और हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
धूम्रपानः धूम्रपान बंद करना और वजन, ब्लड प्रेशर, शुगर व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
गंभीर ब्लॉकेज: कुछ मामलों में एंजियोप्लास्टी और स्टेंट या बायपास सर्जरी (CABG) की जरूरत पड़ सकती है।
अगर अभी सीने में दबाव/दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, उल्टी, चक्कर या दर्द हाथ/जबड़े/पीठ तक जा रहा है, तो घरेलू इलाज न करें—तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लें।

देसी इलाज और कुछ आयुर्वेदिक इलाज
अगर आप दिल की नसों की ब्लॉकेज के लिए देसी या आयुर्वेदिक उपाय पूछ रहे हैं, तो एक जरूरी बात पहले समझ लें—कोई घरेलू नुस्खा या आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी बंद पड़ी धमनी को सीधे खोलने या जमा प्लाक को तुरंत घोलने का साबित इलाज नहीं है। इन्हें केवल डॉक्टर के इलाज के साथ सहायक तौर पर देखा जाना चाहिए।
देसी तरीके जो दिल की सेहत के लिए मददगार हो सकते हैं
लहसुन: भोजन में सामान्य मात्रा में शामिल किया जा सकता है। यह कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर हल्का असर डाल सकता है, लेकिन ब्लॉकेज खोलने की दवा नहीं है।
अलसी और अखरोट: इनमें ओमेगा-3 और अन्य अच्छे फैट होते हैं। इन्हें संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करें।
हल्दी और अदरक: भोजन में इस्तेमाल करना ठीक है और इनमें सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं।
साबुत अनाजः दालें, फल और सब्जियां जरूर खाएं। फाइबर से भरपूर आहार कोलेस्ट्रॉल और हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प है।
नमक, तला-भुना और ट्रांस फैट कम करें। धूम्रपान से पूरी तरह बचें।
आयुर्वेदिक उपचार में क्या ध्यान रखें?
आयुर्वेद में अर्जुन की छाल, अश्वगंधा, गुग्गुल आदि का इस्तेमाल अलग-अलग परिस्थितियों में किया जाता है, लेकिन इन्हें खुद से शुरू करना उचित नहीं है। खासकर अगर आप ब्लड थिनर, BP, शुगर या कोलेस्ट्रॉल की दवाएं लेते हैं, तो जड़ी-बूटियां दवाओं के साथ इंटरैक्शन कर सकती हैं। बहुत से लोग अर्जुन की छाल का काढ़ा/चूर्ण भी ब्लॉकेज खोलने के लिए खाते हैं लेकिन ये प्रमाणित विकल्प नहीं है। आयुर्वेदिक डॉक्टर और आपके कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह के बाद ही इसका इस्तेमाल करें।
सबसे जरूरी बात
अगर जांच में 70%, 80% या 90% ब्लॉकेज जैसी बात सामने आई है तो केवल घरेलू या आयुर्वेदिक इलाज के भरोसे न रहें। कुछ ब्लॉकेज में दवाएं पर्याप्त हो सकती हैं जबकि कुछ मामलों में एंजियोप्लास्टी/स्टेंट या बायपास की जरूरत पड़ सकती है।

