बच्चे को मोटापे से बचाने के लिए दूर करें जंक फूड और फोन, नहीं तो बढ़ जाएगी ये बीमारियां
punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 12:56 PM (IST)
नारी डेस्क: भारत में बच्चों में मोटापा एक तेजी से बढ़ती समस्या बन चुका है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है जहां सबसे ज्यादा बच्चे ओवरवेट या मोटापे (Obesity) से जूझ रहे हैं। 'वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026' के अनुसार, 2025 में भारत में 5 से 9 वर्ष की आयु के लगभग 1.5 करोड़ बच्चे और 10 से 19 वर्ष की आयु के 2.6 करोड़ से अधिक बच्चे अधिक वज़न वाले या मोटापे से ग्रस्त थे। यह केवल दिखावे की समस्या नहीं, बल्कि आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
बच्चों में मोटापा क्यों है खतरनाक?
बचपन का मोटापा आगे चलकर इन समस्याओं का कारण बन सकता है:
-डायबिटीज (शुगर)
-दिल की बीमारी
-हाई ब्लड प्रेशर
-आत्मविश्वास में कमी
-मानसिक तनाव और डिप्रेशन
मोटापा सिर्फ वजन बढ़ना नहीं है, बल्कि यह कई बीमारियों की शुरुआत हो सकता है।

कैसे पहचानें बच्चे के मोटापा को
अगर बच्चे का वजन उसकी उम्र और लंबाई के मुकाबले ज्यादा है, तो यह मोटापे का पहला संकेत हो सकता है। डॉक्टर आमतौर पर BMI (Body Mass Index) या ग्रोथ चार्ट से जांच करते हैं। सिर्फ मोटा दिखना ही नहीं, उम्र के हिसाब से वजन ज्यादा होना असली संकेत है। अगर बच्चे के कपड़े बहुत जल्दी छोटे या टाइट होने लगें, तो यह भी वजन बढ़ने का संकेत है। थोड़ा खेलने या चलने पर ही बच्चा थक जाए,सांस फूलने लगे यह फिटनेस कम होने और वजन बढ़ने का इशारा है।
ज्यादा नींद या सुस्ती भी खतरे की निशानी
बच्चा अक्सर सुस्त रहता है, एनर्जी कम लगती है। शरीर पर अतिरिक्त चर्बी दिखे या पेट बाहर निकले या फिर गर्दन, कमर या जांघों पर ज्यादा फैट जमा हो तो यह मोटापे की निशानी है। अगर बच्चा दूसरों के सामने झिझकता है तो अपने शरीर को लेकर शर्म महसूस करता है यह मानसिक संकेत भी मोटापे से जुड़े हो सकते हैं। अगर बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा हो सांस लेने में परेशानी हो या परिवार में मोटापा/डायबिटीज का इतिहास हो तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। मोटापा एक दिन में नहीं आता, लेकिन समय पर पहचानकर इसे रोका जरूर जा सकता है।

मोटापा घटाने के लिए माता-पिता क्या करें
संतुलित और पौष्टिक आहार दें: बच्चों को जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे पेय से दूर रखें। घर का बना खाना जैसे दाल, सब्जी, रोटी, फल जरूर खिलाएं। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर डाइट दें। जैसा खाना, वैसा बचपन सही खानपान ही असली नींव है।
स्क्रीन टाइम कम करें: टीवी, मोबाइल और वीडियो गेम का समय सीमित करें (1–2 घंटे से ज्यादा नहीं)। ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों को आलसी बना देता है
रोजाना फिजिकल एक्टिविटी जरूरी: बच्चों को रोज कम से कम 1 घंटा खेल-कूद के लिए प्रेरित करें। आउटडोर गेम्स जैसे साइकिल चलाना, क्रिकेट, दौड़ना बेहद फायदेमंद हैंखेल-कूद वाला बच्चा ही सबसे ज्यादा हेल्दी होता है।
पूरी नींद दिलाएं: बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से 8–10 घंटे की नींद जरूरी है। कम नींद से वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है
खाने की सही आदतें सिखाएं: टीवी देखते हुए खाना खाने से बचाएं। धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाने की आदत डालें। ओवरईटिंग से बचाएं
खुद उदाहरण बनें: बच्चे वही सीखते हैं जो माता-पिता करते हैं। अगर आप हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएंगे, तो बच्चा भी अपनाएगा। बच्चों को सिखाने का सबसे अच्छा तरीका है खुद करके दिखाना।
बचपन में ही सही आदतें डाल दी जाएं, तो मोटापा आसानी से रोका जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव जैसे सही खाना, एक्टिव रहना और स्क्रीन टाइम कम करना, बच्चों का भविष्य स्वस्थ बना सकते हैं। आज की सही परवरिश ही कल की अच्छी सेहत की गारंटी है।

