बच्चों को आंखों की थकान से बचाने के लिए टिप्स
punjabkesari.in Saturday, Apr 04, 2026 - 05:55 PM (IST)
नारी डेस्क : बच्चों में आंखों की थकान (Digital Eye Strain) और स्क्रीन से जुड़ी आंखों की समस्याएं गंभीर रूप से बढ़ रही हैं, जिससे नेत्र विशेषज्ञों में चिंता की लहर फैल रही है। स्क्रीन पर लंबे समय तक नज़र बनाए रखने से बच्चों की आंखों को ड्राईनेस, धुंधलापन, आंखों में थकान और सिरदर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं, खासकर जब वे मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर पर घंटों बिताते हैं। आंखों के विशेषज्ञों ने बताया गया है कि आज के बच्चे पहले से कहीं ज्यादा स्क्रीन टाइम के संपर्क में हैं, जिससे डिजिटल आई स्ट्रेन जैसी समस्याएं सामान्य होती जा रही हैं।
स्क्रीन टाइम के नुकसान
लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ता है जिससे आंखों में थकान, धुंधला दिखना और जलन जैसी शिकायतें आती हैं। स्क्रीन के नज़दीक देखने से आंखों को लगातार फोकस बनाए रखना पड़ता है, जिससे accommodative stress होता है और दृष्टि में अस्थायी बदलाव के लक्षण दिख सकते हैं। शोध से यह भी पता चलता है कि स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में ड्राई आई, दृष्टि दोष और आंखों की समस्याओं का जोखिम बढ़ रहा है। लंबी अवधि स्क्रीन पर देखने से आंखों का नमी संतुलन बिगड़ सकता है और आँखें जल्दी थक सकती हैं।

माता‑पिता को क्या करना चाहिए
आंखों पर जोर और थकान कम करने के लिए विशेषज्ञ कुछ आसान परामर्श देते हैं।
20‑20‑20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद बच्चे को कम से कम 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु पर नज़र डालने का अभ्यास करवाएं।
स्क्रीन टाइम सीमित करें: छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को दिन में 1 घंटे तक ही सीमित रखें। बड़े बच्चों के लिए स्कूल के अतिरिक्त 2 घंटे से अधिक न देखें।
यें भी पढ़ें : प्रेगनेंसी में क्यों हो जाते हैं डार्क निप्पल? जानें कैसे करें सही देखभाल
स्क्रीन की दूरी और टाइम सीमा: सुनिश्चित करें कि स्क्रीन की दूरी कम से कम 18‑24 इंच हो और स्क्रीन आंखों के थोड़ा नीचे रखा जाए ताकि आंखों पर तनाव कम हो।
अच्छा प्रकाश और ब्रेक: कमरे में पर्याप्त रोशनी रखें और स्क्रीन से जुड़े कार्य के दौरान नियमित अंतराल पर ब्रेक लें ताकि आंखों को विश्राम मिले।
ऑउटडोर खेल: रोजाना कम से कम 90‑120 मिनट की बाहरी गतिविधि या खेलकूद को प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक रोशनी में खेलने से आंखों की सेहत बेहतर बनी रहती है और myopia (नेत्र दोष) के जोखिम को कम मदद मिलती है।

बच्चों पर ध्यान दें और उन्हें अच्छी आदतें सिखाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समय में स्क्रीन उपयोग को पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन संतुलित समय और सही आदतें अपनाने से बच्चों की आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। माता‑पिता को चाहिए कि वे स्कूल और मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम को संतुलित रखें, समय‑समय पर आंखों की जांच करवाएं और शुरुआती संकेतों पर नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें, ताकि छोटी असहजता बड़ी समस्या न बन जाए।

