दांत खराब हुए तो समझ लो पूरी Body खतरे में है!
punjabkesari.in Friday, Apr 03, 2026 - 08:58 PM (IST)
नारी डेस्क : शरीर की देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन अक्सर हम बड़े अंगों के साथ-साथ दांतों की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर बच्चों के मामले में। बच्चों के दांतों पर लापरवाही करना एक बड़ी गलती साबित हो सकती है। आजकल छोटे बच्चों में दांतों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, फिर भी कई माता-पिता इसे गंभीरता से नहीं लेते। एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर समय पर बच्चों के दांतों की सही देखभाल न की जाए, तो इसका असर सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनकी पूरी शरीर की सेहत पर भी पड़ सकता है।
शुरुआत में ही पहचानें समस्या
बच्चों के दांतों में सड़न (कैविटी) धीरे-धीरे शुरू होती है। शुरुआत में सफेद या हल्के भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो बाद में गड्ढे (कैविटी) में बदल जाते हैं। यह समस्या बैक्टीरिया और मीठे खाने के कारण होती है, जो दांतों की ऊपरी परत (एनामेल) को नुकसान पहुंचाते हैं।

दांत खराब हुए तो शरीर पर भी असर
दांतों की बीमारी सिर्फ दर्द तक सीमित नहीं रहती। रिसर्च बताती है कि बच्चों में दांतों की सड़न से
खाने में दिक्कत होती है
बोलने पर असर पड़ता है
शरीर का विकास प्रभावित हो सकता है
यानी दांत खराब होने का असर पूरे शरीर और बच्चे के विकास पर पड़ सकता है।
दांत ज्यादा खराब हुए तो क्या होगा?
अगर समय रहते इलाज न कराया जाए, तो दांत की सड़न नस (पल्प) तक पहुंच जाती है। इस स्थिति में डॉक्टर के पास दो ही विकल्प बचते हैं।
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दांत निकालना (Tooth Extraction)
अगर दांत पूरी तरह से खराब हो जाए और उसे बचाना संभव न रहे, तो डॉक्टर उसे निकालने (टूथ एक्सट्रैक्शन) की सलाह देते हैं। यह स्थिति तब आती है जब सड़न बहुत ज्यादा बढ़ जाती है या संक्रमण दांत की जड़ों तक पहुंच जाता है, ऐसे में दर्द से राहत और आगे की समस्या से बचने के लिए दांत निकालना जरूरी हो जाता है।

रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT)
रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दांत के अंदर मौजूद संक्रमित नस (पल्प) को हटाकर दांत को बचाने की कोशिश की जाती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब दांतों की सड़न बहुत गहरी हो जाती है और संक्रमण जड़ों तक पहुंच जाता है, तब दर्द से राहत पाने और दांत को सुरक्षित रखने के लिए RCT जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति में अक्सर रूट कैनाल या दांत निकालना ही अंतिम विकल्प बचता है।
हर कैविटी में RCT जरूरी नहीं: यह जानना भी जरूरी है कि हर कैविटी में रूट कैनाल जरूरी नहीं होता। अगर समय रहते इलाज हो जाए, तो दांत को बिना RCT के भी बचाया जा सकता है।
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बच्चों के दांत कैसे बचाएं?
दिन में 2 बार ब्रश करवाएं
ज्यादा मीठा और जंक फूड से बचाएं
हर 6 महीने में डेंटिस्ट को दिखाएं
दूध पीने के बाद मुंह साफ करवाएं
फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें।

बच्चों के दांतों को नजरअंदाज करना बड़ी गलती हो सकती है। छोटी सी कैविटी अगर समय पर ठीक न हो, तो आगे चलकर दांत निकालने या रूट कैनाल जैसी बड़ी परेशानी बन सकती है। इसलिए शुरुआत से ही बच्चों के दांतों की सही देखभाल करना बेहद जरूरी है।

