बिना लक्षण के अचानक आंखों की रोशनी छीन लेता है काला मोतिया, पहले ही करवा लें टेस्ट

punjabkesari.in Saturday, Jan 10, 2026 - 01:10 PM (IST)

नारी डेस्क:  काला मोतिया (Glaucoma) एक गंभीर आंखों की बीमारी है, जो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए समय रहते जांच बहुत जरूरी मानी जाती है। साल में एक बार आई चेक-अप आपकी आंखों की रोशनी को जीवनभर सुरक्षित रख सकती है। 


काला मोतिया क्या है?

काला मोतिया आंखों में दबाव (Intraocular Pressure)बढ़ने के कारण होता है, जिससे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है, धीरे-धीरे नजर कमजोर होती जाती है। समय पर इलाज न हो तो स्थायी अंधापन भी हो सकता है। 40 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है। जिनके परिवार में काला मोतिया रहा हो उन्हें भी सावधान रहने की जरूरत है। डायबिटीज या हाई BP के मरीज भी सतर्क रहें। 


काला मोतिया से बचने के लिए ये टेस्ट जरूरी हैं


आई प्रेशर टेस्ट (Tonometry):  इससे आंखों के अंदर का दबाव मापा जाता है। बढ़ा हुआ प्रेशर काला मोतिया का पहला संकेत हो सकता है

ऑप्टिक नर्व एग्जामिनेशन: यह आंखों की नस (Optic Nerve) की स्थिति जांची जाती है। नर्व में डैमेज का पता चल जाता है

 विजुअल फील्ड टेस्ट: इससे यह देखा जाता है कि आपकी साइड विजन प्रभावित तो नहीं हो रही। काला मोतिया सबसे पहले साइड विजन को नुकसान पहुंचाता है

OCT टेस्ट (Optical Coherence Tomography): यह एक एडवांस टेस्ट है, आंखों की नसों की परतों की मोटाई मापता है। इससे शुरुआती नुकसान भी पकड़ में आ जाता है

 कॉर्निया थिकनेस टेस्ट (Pachymetry): आंख की पुतली की मोटाई मापी जाती है। इससे आई प्रेशर की सही रीडिंग समझने में मदद मिलती है


 डॉक्टरों की सलाह

काला मोतिया दिखता नहीं, लेकिन नुकसान कर देता है  इसलिए लक्षण का इंतजार न करें, जांच कराएं। काला मोतिया से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।  समय-समय पर आंखों की जांच। जरूरी टेस्ट पहले ही करवा लेना। साल में एक बार आई चेक-अप आपकी आंखों की रोशनी जीवनभर सुरक्षित रख सकता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static