समय से पहले जन्मे बच्चों में हर्निया का खतरा क्यों होता है ज्यादा? डॉक्टर से जानिए कब जरूरी है सर्जरी
punjabkesari.in Sunday, Aug 31, 2025 - 04:12 PM (IST)

नारी डेस्क : समय से पहले जन्मे शिशुओं (प्रीटर्म बेबी) को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा रहता है। इन्हीं में से एक समस्या है हर्निया, जो इन बच्चों में सामान्य बच्चों की तुलना में ज्यादा पाई जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, प्रीटर्म बच्चों में पेट और शरीर की मांसपेशियों का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता, इसी वजह से उनमें हर्निया का रिस्क अधिक होता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि प्रीटर्म बच्चों में हर्निया क्यों होता है और कब सर्जरी कराना जरूरी हो जाता है।
प्रीटर्म (Preterm) बच्चे कौन होते हैं?
अगर बच्चा 37 सप्ताह की गर्भावस्था से पहले पैदा होता है तो उसे प्रीटर्म बेबी कहा जाता है। ऐसे बच्चों में अंगों और मांसपेशियों का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता। यही वजह है कि उनका शरीर कई बार कमजोर रहता है और वे हर्निया जैसी समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
हर्निया क्या है?
हर्निया एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंत या पेट के किसी हिस्से का टिश्यू कमजोर मांसपेशियों से बाहर की ओर उभर आता है। यह ज्यादातर ग्रोइन यानी जांघ और कमर के जोड़ के पास या नाभि के आसपास दिखाई देता है। प्रीटर्म बच्चों में सबसे आम रूप से इंगुइनल हर्निया पाया जाता है, जो ग्रोइन एरिया में होता है। इसके अलावा कई बच्चों में नाभि हर्निया भी देखा जाता है।
कब जरूरी होती है सर्जरी?
हर्निया का इलाज उसकी स्थिति और गंभीरता पर निर्भर करता है। डॉक्टर कुछ मामलों में तुरंत सर्जरी की सलाह देते हैं, जबकि कुछ मामलों में इंतजार किया जा सकता है।
इंगुइनल हर्निया (Inguinal Hernia)
प्रीटर्म बच्चों में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला हर्निया इंगुइनल हर्निया होता है। इसमें आंत का कुछ हिस्सा ग्रोइन एरिया यानी जांघ और पेट के जोड़ के पास बाहर निकल आता है। यह समस्या दिखने में साधारण लग सकती है, लेकिन अगर समय रहते इसका इलाज न हो तो आंतों में खून का बहाव रुक सकता है, जिससे गंभीर जटिलताएं और जान का खतरा भी हो सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर इस स्थिति में देर न करने और जल्द से जल्द सर्जरी करवाने की सलाह देते हैं।
नाभि हर्निया (Umbilical Hernia)
नाभि हर्निया प्रीटर्म बच्चों में एक सामान्य समस्या है, जो अक्सर बच्चे के बढ़ने के साथ अपने आप ठीक हो जाती है। कई बार यह बिना किसी इलाज के बंद हो जाता है, लेकिन अगर यह हर्निया एक साल की उम्र तक बंद न हो, आकार में धीरे-धीरे बढ़ने लगे या बच्चे को दर्द और असुविधा देने लगे, तो डॉक्टर सर्जरी कराने की सलाह देते हैं ताकि आगे की किसी परेशानी से बचा जा सके।
स्ट्रैंगुलेटेड हर्निया (Strangulated Hernia)
स्ट्रैंगुलेटेड हर्निया एक गंभीर और खतरनाक स्थिति होती है, जिसमें हर्निया वाली जगह पर अचानक तेज दर्द, सूजन या लाली दिखाई देती है। कई बार बच्चा लगातार उल्टी करने लगता है या बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाता है। इस स्थिति में आंत तक खून का बहाव रुक सकता है, जिससे आंत को स्थायी नुकसान होने का खतरा रहता है। इसलिए स्ट्रैंगुलेटेड हर्निया होने पर तुरंत सर्जरी करना बेहद जरूरी होता है।
माता-पिता को क्या ध्यान रखना चाहिए?
प्रीटर्म बच्चों में हर्निया की संभावना को देखते हुए माता-पिता को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। अगर बच्चा बार-बार रोता है, पेट या ग्रोइन एरिया में सूजन दिखाई देती है, या नाभि और जांघ के पास कोई ऐसा उभार दिखे जो दबाने पर अंदर चला जाए, तो यह हर्निया का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। वहीं अगर स्ट्रैंगुलेटेड हर्निया के लक्षण जैसे तेज दर्द, लाली या उल्टी दिखाई दें, तो देर किए बिना तुरंत बच्चे को अस्पताल ले जाना चाहिए।
प्रीटर्म बच्चों में हर्निया एक आम लेकिन गंभीर समस्या हो सकती है। ज्यादातर मामलों में समय रहते पहचान और सर्जरी से इसे ठीक किया जा सकता है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे की छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज न करें और नियमित रूप से पेडियाट्रिक सर्जन से सलाह लेते रहें।