बवासीर से भी ज्यादा खतरनाक है ये बीमारी, इसमें तेज दर्द कर देता है बुरा हाल

punjabkesari.in Saturday, Sep 19, 2026 - 12:28 PM (IST)

नारी डेस्क: टॉयलेट में लाल रंग देखकर कोई भी घबरा सकता है और कई लोग तुरंत इसी डरावने नतीजे पर पहुंच जाते हैं कि 'यह पाइल्स (बवासीर) है'। लेकिन हर बार ब्लीडिंग पाइल्स (जिसे मेडिकल भाषा में हेमोराइड्स कहते हैं) इसकी वजह नहीं होती। एक और आम समस्या है जिसके लक्षण भी ऐसे ही होते हैं, और वह है एनल फिशर, जिसके बारे में हर किसी को जानकारी नहीं है। चलिए समझते हैं इसके बारे में विस्तार से। 


क्या है एनल फिशर?

HT लाइफ़स्टाइल के साथ एक इंटरव्यू में बताया कि-  दोनों समस्याएं शरीर के एक ही हिस्से को प्रभावित करती हैं, लेकिन शरीर पर इनका असर अलग-अलग तरह से होता है। राहत पाने के लिए इनके बीच का फ़र्क समझना पहला कदम है। जहां हेमोराइड्स में मलाशय के निचले हिस्से या गुदा के आस-पास की रक्त वाहिकाएं (blood vessels) सूज जाती हैं, वहीं एनल फिशर में एनल कैनाल की नाज़ुक परत में एक छोटा सा कट या दरार आ जाती है।


बवासीर और एनल फिशर में अंतर

 एनल फिशर में आमतौर पर मल त्यागने के दौरान और उसके तुरंत बाद बहुत तेज़ या जलन वाला दर्द होता है, जो कई मिनटों या घंटों तक बना रह सकता है। अक्सर इसके साथ ताज़ा लाल खून भी दिखाई देता है, जो टॉयलेट पेपर या टॉयलेट बाउल में देखा जा सकता है। बवासीर (पाइल्स) में दर्द हमेशा मुख्य लक्षण नहीं होता। इसके उलट बवासीर में मुख्य रूप से सूजन वाली जगह के आसपास बेचैनी, भारीपन या खुजली महसूस होती है।अंदरूनी बवासीर में अक्सर मल त्यागते समय बिना दर्द के खून आता है, जबकि गंभीर मामलों में खून की नसें सूज जाती हैं और ज़ोर लगाने पर बाहर की तरफ उभर आती हैं।


इस कारण होती है ये समस्या

डॉक्टर ने बताया कि-  दोनों ही स्थितियों के पीछे असल वजह एक ही तरह का मैकेनिकल दबाव है। बवासीर (haemorrhoids) और एनल फिशर (anal fissures), दोनों का मुख्य कारण पेल्विक ब्लड वेसल्स और आसपास के टिश्यू पर बढ़ता दबाव है। लंबे समय तक कब्ज, लगातार ज़ोर लगाना और कम फाइबर वाला खाना इसके मुख्य कारण हैं, क्योंकि सख्त मल निकलने के दौरान मैकेनिकल चोट पहुंचाता है। 


बचाव के तरीके 

बचाव के लिए पूरी जीवनशैली बदलने की ज़रूरत नहीं है। रोज़ाना की कुछ खास आदतें ही बड़ा फ़र्क लाती हैं।  ताज़े फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और दालें/फलियां खूब खाएं ताकि मल नरम रहे। पाचन ठीक रखने और मल को सख्त होने से बचाने के लिए दिन भर खूब पानी पिएं। जब भी मल त्यागने की इच्छा हो, तो तुरंत जाएं कभी भी ज़बरदस्ती मल त्यागने की कोशिश न करें और न ही प्राकृतिक इच्छा को रोकें। टॉयलेट पर बैठकर ज़्यादा देर तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या कुछ पढ़ने से बचें।नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करने से कब्ज़ की समस्या नहीं होती और पेल्विक ब्लड वेसल्स (श्रोणि क्षेत्र की रक्त वाहिकाओं) पर दबाव कम होता है।
 


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Content Writer

vasudha

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