क्या सच में जवानी में ही बंद हो रहे पीरियड्स ? जानिए किस कारण Teenagers को हो रहा Menopause

punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2026 - 10:22 AM (IST)

नारी डेस्क: लड़कियों को जब पहली बार पीरियड्स आते हैं, तो उनमें थोड़ी अनियमितता होना सामान्य बात है, लेकिन टीनएजर्स को अपने मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) में गंभीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि  13 साल तक की किशोरियों को भी  मेनोपॉज का सामना करना पड़ रहा है। चलिए जानते हैं किशोर लड़कियों को पीरियड्स से जुड़ी किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और कब मदद लेनी चाहिए। 


एक बार शुरू होने के बाद क्यों रुक जाते हैं पीरियड्स

लड़कियों को आमतौर पर 12 या 13 साल की उम्र में पहला पीरियड आता है। यह इस बात का संकेत है कि आपका शरीर बड़ा हो रहा है। 15 साल की उम्र तक, 98% किशोरियों को पीरियड आने लगते हैं। हर महिला का मासिक धर्म चक्र (पीरियड साइकल), ओवरी, दिमाग और गर्भाशय में मौजूद हार्मोन के बीच एक जटिल संतुलन होता है। जब लड़कियों को पीरियड्स शुरू होते हैं, तो उनके शरीर को एडजस्ट होने और यह समझने में समय लगता है कि मासिक धर्म चक्र के सभी हिस्से एक साथ कैसे काम करते हैं। इसीलिए, पहली बार पीरियड आने के बाद लगभग दो साल तक टीनएज लड़कियों  के पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि उसे एक महीने में दो बार पीरियड आएं या कई महीनों तक पीरियड न आएं।
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ये है असली समस्या

टीनएज लड़कियां का शरीर हार्मोन में होने वाले बदलावों, जैसे कि स्ट्रेस हार्मोन से भी बहुत प्रभावित होता है।  स्कूल में तनाव के समय या परिवार के साथ यात्रा करते समय, उसके पीरियड्स जल्दी आ जाते हैं या देर से आते हैं। समय के साथ, ज़्यादातर टीनएजर्स का मासिक धर्म चक्र ठीक हो जाता है और एक निश्चित पैटर्न का पालन करने लगता है। अगर आपकी टीनएज बेटी का चक्र समस्यापूर्ण बना रहता है, तो इसके पीछे कोई अंदरूनी समस्या हो सकती है, जैसे कि: एंडोमेट्रियोसिस, पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS),  पेल्विक इंफ्लेमेटरी बीमारी, फाइब्रॉएड या पॉलीप्स, एडेनोमायोसिस, थायराइड की समस्या। योनि या सर्विक्स में सूजन भी मासिक धर्म की समस्याओं का कारण बन सकती है।


भविष्य में आ सकता है संकट

एक नए अध्ययन में  बताया गया है कि किसी लड़की के पीरियड्स अगर बार-बार अनियमित हों या कई महीनों बंद रहें तो इसे केवल उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर अंडाशय समय से पहले काम करना बंद कर दें तो भविष्य में मां बनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही हड्डियां कमजोर होने और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।  अगर किसी महिला का मेनोपॉज 40 साल की उम्र से पहले हो जाता है, तो भविष्य में उसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में काफी अधिक हो सकता है।

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स्त्री रोग विशेषज्ञ को कब दिखाना चाहिए?

गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह है कि टीनएज लड़कियां 13-15 साल की उम्र के बीच अपनी पहली गायनेकोलॉजिकल विज़िट तय करें, भले ही उन्हें मासिक धर्म की कोई समस्या न हो। अगर इस तरह की समस्याएं दिखे जैसे नियमित पीरियड्स का अनियमित हो जाना, पीरियड्स का रुक जाना, पीरियड्स का कम बार आना (हर 45 दिनों से ज़्यादा समय में), पीरियड्स का हर 21 दिनों से ज़्यादा बार आना, पीरियड्स का सात दिनों से ज़्यादा समय तक चलना, पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग होना,  छाती में पेट, चेहरे या ठुड्डी पर ज़्यादा बाल उगले लगे तो गायनेकोलॉजिस्ट के पस जाने में देर ना करें 


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vasudha

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