Diabetes हो भी जाएगी और आपको पता भी नहीं चलेगा,  शुगर की  नॉर्मल रिपोर्ट की जानो पूरी सच्चाई

punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 12:41 PM (IST)

नारी डेस्क:  अक्सर लोग मानते हैं कि अगर उनका ब्लड शुगर “नॉर्मल” आ रहा है, तो उन्हें डायबिटीज़ का खतरा नहीं है। लेकिन न्यूरोलॉजिस्ट और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह सोच कई बार गलत साबित हो सकती है। नॉर्मल शुगर लेवल हमेशा पूरी सच्चाई नहीं बताते खासकर शुरुआती डायबिटीज़ के मामलों में। इसलिए सही समय पर सही टेस्ट कराना और लाइफस्टाइल सुधारना ही असली बचाव है।

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 क्यों “नॉर्मल” शुगर लेवल भ्रामक हो सकता है?

डॉक्टर्स बताते हैं कि आमतौर पर जो टेस्ट लोग कराते हैं जैसे फास्टिंग ब्लड शुगर (FBS) वह शुरुआती डायबिटीज़ पकड़ने में सबसे कम संवेदनशील (least sensitive) टेस्ट होता है। इसका मतलब आपका फास्टिंग शुगर नॉर्मल आ सकता है लेकिन शरीर के अंदर इंसुलिन रेजिस्टेंस या शुरुआती डायबिटीज़ शुरू हो चुकी हो सकती है। डायबिटीज़ अचानक नहीं होती, यह धीरे-धीरे बढ़ती है। शुरुआती स्टेज में शरीर इंसुलिन बनाता तो है लेकिन कोशिकाएं (cells) उसे ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पातीं। इसे ही इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है और यही असली खतरे की शुरुआत है।


ये टेस्ट देते हैं सही जानकारी

अगर आपको सही स्थिति जाननी है, तो सिर्फ फास्टिंग शुगर पर भरोसा न करें। ये टेस्ट ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं:

 HbA1c टेस्ट: पिछले 2-3 महीनों का एवरेज शुगर लेवल दिखाता है, डायबिटीज़ का बेहतर संकेत देता है

OGTT (Oral Glucose Tolerance Test): ग्लूकोज लेने के बाद शरीर शुगर को कैसे प्रोसेस करता है, यह बताता है। शुरुआती डायबिटीज़ पकड़ने में मददगार है। 

Postprandial Blood Sugar (PPBS): खाने के 2 घंटे बाद का शुगर लेवल कई बार यही बढ़ा हुआ मिलता है जबकि फास्टिंग नॉर्मल रहता है

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जल्दी पहचान है जरूरी ?

अगर डायबिटीज़ को समय रहते नहीं पहचाना गया, तो यह धीरे-धीरे नसों (nerves) को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे  झनझनाहट या सुन्नपन, याददाश्त पर असर।  ब्रेन और हार्ट से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।इसलिए “नॉर्मल” शुगर लेवल देखकर पूरी तरह निश्चिंत होना सही नहीं है। फास्टिंग शुगर टेस्ट शुरुआती डायबिटीज़ पकड़ने में कमजोर हो सकता है।


शुगर कंट्रोल में रखने के टिप्स 

-रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करें
-रिफाइंड शुगर और जंक फूड कम करें
-फाइबर और प्रोटीन वाली डाइट लें
-वजन संतुलित रखें
-समय-समय पर सही टेस्ट कराते रहें
 


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Content Writer

vasudha

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