35 की उम्र में शुरू करी UPSC की तैयारी, 40 में बनीं IAS, रच दिया इतिहास
punjabkesari.in Monday, Apr 06, 2026 - 05:24 PM (IST)
नारी डेस्क: कई लोग सोचते हैं कि सपनों को पूरा करने की एक उम्र होती है, लेकिन कुछ कहानियां इस सोच को पूरी तरह बदल देती हैं। अगर आपके अंदर कुछ करने का जुनून हो, तो उम्र, जिम्मेदारियां और मुश्किलें कभी भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। 35 साल की उम्र में जब ज्यादातर लोग जिम्मेदारियों में उलझे होते हैं, तब एक महिला ने अपने सपनों को नया मौका देने का फैसला किया और 40 की उम्र में IAS बनकर इतिहास रच दिया। यह कहानी सिर्फ एक सफलता की नहीं, बल्कि हिम्मत, धैर्य और खुद पर भरोसा रखने की मिसाल है। यह हमें सिखाती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो न उम्र मायने रखती है और न ही हालात सपने कभी भी पूरे किए जा सकते हैं।
परिवार और जिम्मेदारियों के बीच लिया बड़ा फैसला
निसा शादीशुदा हैं और दो बच्चों की मां हैं। वह नौकरी भी करती थीं और साथ ही घर की जिम्मेदारियां भी संभालती थीं। इन सबके बीच 35 साल की उम्र में उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू करने का फैसला लिया, जो उनके लिए आसान नहीं था। दिनभर काम और घर संभालने के बाद वे रात में पढ़ाई करती थीं। उनकी दिनचर्या काफी कठिन थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इस सफर में उनके पति और परिवार ने उनका पूरा साथ दिया।

बच्चों और परिवार से मिला हौसला
निसा की बेटियां नंदना और थान्वी उनकी सबसे बड़ी ताकत बनीं। उनके पति अरुण और पूरे परिवार ने उन्हें हर कदम पर सपोर्ट किया। यही सहयोग उनके लिए प्रेरणा बना और उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना जारी रखा।
चुनौतियां आईं, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी
निसा को सुनने में परेशानी थी, जो उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने UPSC परीक्षा 6 बार दी, लेकिन हर बार असफल रहीं। फिर भी उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी और हर असफलता से कुछ नया सीखा।
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सातवें प्रयास में मिली सफलता
आखिरकार, निसा की मेहनत रंग लाई। उन्होंने अपने 7वें प्रयास में 2024 की UPSC परीक्षा पास की और करीब 1000वीं रैंक हासिल की। यह उनकी कड़ी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास का परिणाम था।
प्रेरणा और सही मार्गदर्शन की भूमिका
निसा ने तिरुवनंतपुरम के एक कोचिंग सेंटर से मार्गदर्शन लिया। उन्हें प्रेरणा उन लोगों से मिली, जिन्होंने मुश्किल हालात में सफलता हासिल की थी। उन्होंने सब-कलेक्टर रंजीत से भी प्रेरणा ली, जो खुद भी ऐसी ही चुनौतियों से गुजरकर सफल हुए थे।

निसा का संदेश
निसा का मानना है कि उनकी हर कोशिश ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। उन्होंने कभी भी किसी असफलता को बेकार नहीं माना। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। निसा उन्निराजन की यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो किसी वजह से अपने सपनों को टाल देता है। उन्होंने दिखा दिया कि उम्र, जिम्मेदारियां और मुश्किलें सफलता के रास्ते की रुकावट नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाने का जरिया हैं।

