आंतों में छिपा ये खतरा बढ़ा सकता है कैंसर का रिस्क, समय रहते पहचान जरूरी

punjabkesari.in Tuesday, Mar 17, 2026 - 11:51 AM (IST)

 नारी डेस्क:  आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। गलत खानपान, बाहर का जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि और तनाव जैसी आदतें पेट और आंतों से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा रही हैं। कई बार पेट दर्द, कब्ज या गैस जैसी दिक्कतों को हम सामान्य समझकर टाल देते हैं, लेकिन ये छोटी समस्याएं कभी-कभी बड़े खतरे का संकेत भी हो सकती हैं। हाल ही में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि आंतों में बनने वाली कुछ खास तरह की गांठें आगे चलकर कैंसर का खतरा कई गुना तक बढ़ा सकती हैं।

क्या होता है आंत का कैंसर?

आंत का कैंसर, जिसे कोलोरेक्टल कैंसर कहा जाता है, एक गंभीर बीमारी है। यह तब होता है जब आंत की अंदरूनी परत की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। यह असामान्य वृद्धि धीरे-धीरे गांठ का रूप ले लेती है, जिसे पॉलीप्स कहा जाता है। शुरुआत में ये पॉलीप्स आमतौर पर हानिरहित होते हैं और कोई खास लक्षण भी नहीं दिखाते, लेकिन समय के साथ इनमें बदलाव आ सकता है और ये कैंसर में बदल सकते हैं।

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पॉलीप्स बनने के पीछे क्या कारण होते हैं?

पॉलीप्स बनने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण है खराब जीवनशैली और खानपान। जब हम फाइबर से भरपूर भोजन की जगह ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, तो पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा बढ़ती उम्र, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन और परिवार में कैंसर की हिस्ट्री भी इस समस्या के खतरे को बढ़ा देते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपनी डाइट और जीवनशैली पर ध्यान दें।

कौन से पॉलीप्स सबसे ज्यादा खतरनाक हैं?

रिसर्च में खास तौर पर दो प्रकार के पॉलीप्स को ज्यादा खतरनाक बताया गया है  एडेनोमा और सेरेटेड पॉलीप्स। एडेनोमा पॉलीप्स धीरे-धीरे बढ़ते हैं और समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं। वहीं सेरेटेड पॉलीप्स तेजी से बदलाव दिखाते हैं और कुछ मामलों में ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। रिसर्च में यह भी पाया गया कि जिन लोगों में ये दोनों प्रकार के पॉलीप्स एक साथ मौजूद होते हैं, उनमें कैंसर का खतरा लगभग 5 गुना तक बढ़ सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर ऐसे मामलों में ज्यादा सतर्क रहने की सलाह देते हैं।

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बचाव कैसे किया जा सकता है?

इस तरह की गंभीर समस्या से बचने के लिए सबसे जरूरी है समय रहते जांच और सही जीवनशैली अपनाना। कोलोनोस्कोपी एक ऐसी जांच है जिससे आंतों के अंदर मौजूद पॉलीप्स का पता लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाया भी जा सकता है। इसके अलावा रोजाना फाइबर से भरपूर भोजन करना, जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज, काफी फायदेमंद होता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी पीना और जंक फूड से दूरी बनाना भी इस बीमारी के खतरे को कम करने में मदद करता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

अक्सर लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकते हैं। अगर लंबे समय तक पेट दर्द, कब्ज, पाचन में गड़बड़ी, मल में खून आना या बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से बड़ी बीमारी को रोका जा सकता है।

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आंतों में बनने वाली छोटी-छोटी गांठें भले ही शुरुआत में सामान्य लगें, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर पहचान, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है। इसलिए अपने शरीर के संकेतों को समझें और समय रहते सही कदम उठाएं।  


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Content Editor

Priya Yadav

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