बार-बार मिसकैरेज से प्रेगनेंसी होने के चांस कितने? कहीं रिस्क तो नहीं...जानिए

punjabkesari.in Tuesday, Apr 21, 2026 - 03:49 PM (IST)

नारी डेस्क: किसी भी महिला के लिए गर्भावस्था जीवन का बहुत ही खास समय होता है। लेकिन कई बार यह खुशी अधूरी रह जाती है और उसे गर्भपात (miscarriage) का सामना करना पड़ता है। लेकिन, अगर ऐसा बार-बार होता है तो उनके मन में कई सवाल आने लगते है। जिनमें से एक सवाल है कि क्या बार-बार मिसकैरेज होने से प्रेगनेंसी होने के चांस कम हो जाते हैं? इस लेख में आज हम जानेंगे कि मिसकैरेज होने के कारण क्या होते है और प्रेगनेंसी के कितने चांस होते है। चहिए जानते है एक्सपर्ट से...

मिसकैरेज के कारण (Causes of Miscarriage)

गर्भपात यानी मिसकैरेज तब होता है जब गर्भ में पल रहा शिशु 20 हफ्ते से पहले ही नष्ट हो जाता है। यह एक भावनात्मक रूप से बहुत ही कठिन अनुभव होता है। बार-बार मिसकैरेज के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे हॉर्मोनल असंतुलन, थायरॉयड की समस्या, जेनेटिक गड़बड़ी, यूटरस की संरचना में बदलाव, इम्यून सिस्टम की कमजोरी या ब्लड क्लॉटिंग से जुड़ी दिक्कतें। भ्रूण में अनुवांशिक गड़बड़ी होने से उसका सही विकास नहीं हो पाता और गर्भपात हो सकता है।

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गर्भपात के लक्षण (Symptoms of Miscarriage)

योनि से खून आना (हल्का या तेज़)
पेट या पीठ के निचले हिस्से में तेज़ दर्द
भूरे रंग का डिस्चार्ज
गर्भावस्था के लक्षणों जैसे उल्टी, जी मिचलाना आदि का अचानक बंद हो जाना
थकान और कमजोरी

बार-बार मिसकैरेज के बाद प्रेगनेंसी के चांस कितने?

एक्सपर्ट के मुताबिक, हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए एक से ज्यादा मिसकैरेज होने का असर भी हर केस में अलग हो सकता है। कई मामलों में महिलाएं बार-बार मिसकैरेज के बाद भी सफल रूप से प्रेगनेंट होती हैं और स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं। सही समय पर जांच और डॉक्टर की देखरेख में कारणों की पहचान कर उन्हें मैनेज किया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी टेस्ट और दवाइयों का पालन करने से जोखिम कम किया जा सकता है। अच्छे लाइफस्टाइल, सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस को कंट्रोल करना शरीर को मजबूत बनाता है। इसके अलावा मेडिकल साइंस में अब कई ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनकी मदद लेकर इस रिस्क को कम किया जा सकता है। अगल पहले से मिसकैरेज हो चुका है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। इसलिए केवल मिसकैरेज का इतिहास होने से यह मान लेना सही नहीं है कि आगे प्रेगनेंसी संभव नहीं होगी। सही मार्गदर्शन और पॉजिटिव अप्रोच से स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है। 
 


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Content Editor

Pooja Gill

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