10 या 11 जुलाई, किस दिन रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? जानें सही तिथि

punjabkesari.in Wednesday, Jul 01, 2026 - 03:12 PM (IST)

नारी डेस्क: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आने वाली योगिनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस बार एकादशी तिथि 10 और 11 जुलाई, दोनों दिनों में पड़ने की वजह से श्रद्धालुओं के बीच व्रत की सही तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं कि पंचांग और शास्त्रीय नियमों के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा।

योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पद्म पुराण के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को विधि-विधान से करता है, उसे 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत पापों का नाश करने वाला माना जाता है और भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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योगिनी एकादशी 2026 कब है

वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 10 मिनट से होगा। यह तिथि 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। यही कारण है कि इस बार कई श्रद्धालु इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि व्रत 10 जुलाई को रखा जाए या 11 जुलाई को।

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10 या 11 जुलाई, किस दिन रखें व्रत

ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार, इस वर्ष दोनों दिनों में सूर्योदय के समय एकादशी तिथि पूर्ण रूप से विद्यमान नहीं है। 11 जुलाई को सूर्योदय से पहले ही एकादशी समाप्त होकर द्वादशी लग जाएगी। शास्त्रों में ऐसे विशेष संयोग को एकादशी क्षय की स्थिति माना जाता है। धार्मिक नियमों के अनुसार जब दोनों दिनों सूर्योदय के समय एकादशी तिथि उपलब्ध न हो, तब पहले दिन ही एकादशी व्रत करना श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए गृहस्थ लोगों के लिए 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को योगिनी एकादशी व्रत रखना शास्त्रसम्मत होगा। वहीं, वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई को व्रत रख सकते हैं।

योगिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

विवरण                                                     समय
                                              
एकादशी तिथि प्रारंभ                           10 जुलाई 2026, शुक्रवार, सुबह 8:10 बजे
एकादशी तिथि समाप्त                         11 जुलाई 2026, शनिवार, सुबह 5:23 बजे
गृहस्थों के लिए व्रत                              10 जुलाई 2026
वैष्णव एकादशी                                  11 जुलाई 2026

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योगिनी एकादशी व्रत की विधि

योगिनी एकादशी का व्रत केवल एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि इसके नियमों का पालन दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है। दशमी के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इस दिन विशेष रूप से मूंग, मसूर, गेहूं, जौ और बैंगन का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान पर कलश स्थापित करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें तथा विष्णु मंत्रों या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

व्रत के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी और द्वादशी दोनों दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसलिए पूजा में उपयोग के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए। एकादशी के दिन स्वयं व्रती और परिवार के सदस्यों को भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि इस नियम का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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द्वादशी के दिन करें पारण और दान

योगिनी एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण से पहले अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना गया है। पद्म पुराण में भी एकादशी के साथ दान-पुण्य के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है। योगिनी एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, भगवान विष्णु की भक्ति और पुण्य कर्मों का संदेश देने वाला पावन अवसर भी है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
 
 
 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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