निर्जला एकादशी पर करें इन वस्तुओं का दान, माना जाता है अक्षय पुण्यदायी
punjabkesari.in Wednesday, Jun 24, 2026 - 01:47 PM (IST)
नारी डेस्क: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है, जिसे सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ कहा गया है। मान्यता है कि इस एक व्रत के पुण्य से वर्षभर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखने का विधान है, इसलिए इसे “निर्जला” कहा जाता है। साथ ही, धर्मग्रंथों और पद्म पुराण में इस दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है।
निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व
निर्जला एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति की पराकाष्ठा मानी जाती है। भीषण गर्मी में जल त्याग कर व्रत रखना साधना का कठिन स्वरूप है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और नियमपूर्वक व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष के मार्ग खुलते हैं।

जल और घड़े का दान: जीवनदान के समान पुण्य
निर्जला एकादशी पर जलदान को सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है। गर्मी के इस समय में किसी प्यासे को पानी पिलाना या जल से भरा घड़ा दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार जल को जीवन और ऊर्जा का आधार कहा गया है। इसलिए इसका दान करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ती है।
सत्तू और शीतल अन्न का दान
उत्तर भारत में इस दिन सत्तू दान की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। सत्तू गर्मी में शरीर को ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है। इसे जरूरतमंदों को देना अन्नदान के समान माना गया है। इसके साथ गुड़ और अन्य शीतल पदार्थों का दान भी लोककल्याणकारी बताया गया है।
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छाता और पंखा दान का महत्व
निर्जला एकादशी पर छाता दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। छाता केवल धूप से बचाव का साधन नहीं, बल्कि संरक्षण और सहारे का प्रतीक है। इसी प्रकार पंखा या शीतलता देने वाली वस्तुओं का दान भी कष्ट निवारण का माध्यम माना गया है। मान्यता है कि इससे जीवन में आने वाली बाधाएँ कम होती हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

वस्त्र दान: सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक
वस्त्र दान को शास्त्रों में श्रेष्ठ दानों में स्थान दिया गया है। यह केवल भौतिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा की रक्षा का माध्यम भी माना जाता है। निर्जला एकादशी पर जरूरतमंदों को वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है और इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अन्न और फल दान का महत्व
भोजन और फल का दान इस दिन विशेष रूप से शुभ माना गया है। अन्नदान को महादान कहा गया है क्योंकि यह सीधे किसी भूखे की आवश्यकता पूरी करता है। फल और मौसमी खाद्य पदार्थ सात्विकता, स्वास्थ्य और संतुलन का प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे दान से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
पद्म पुराण में वर्णित विशेष दान
पद्म पुराण में निर्जला एकादशी पर किए जाने वाले दानों का विस्तृत उल्लेख मिलता है। इसके अनुसार इस दिन आसन, शय्या, जल, गाय, कमंडल और छाते का दान अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि ब्राह्मण को जूते या शक्कर के साथ जल से भरा घड़ा दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि इन दानों से व्यक्ति विष्णु लोक के समीप पहुंचता है और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करता है। निर्जला एकादशी केवल व्रत नहीं, बल्कि सेवा, संयम और दान की भावना को जागृत करने का पर्व है। इस दिन किया गया छोटा सा दान भी अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, सच्चे भाव से किया गया दान ही भगवान विष्णु की कृपा का मार्ग बनता है और जीवन को सार्थकता प्रदान करता है।

