नेतागिरी छोड़ ब्लिंकिट के  डिलीवरी बॉय बने राघव चड्ढा, ठंड में घर- घर जाकर दिया सामान

punjabkesari.in Monday, Jan 12, 2026 - 06:07 PM (IST)

नारी डेस्क: AAP सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के साथ एक डिलीवरी एजेंट के तौर पर एक दिन बिताने का अपना वीडियो शेयर किया। उन्होंने भारत के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की गिग इकॉनमी में सुधार और डिलीवरी वर्कर्स के लिए बेहतर काम करने की स्थितियों पर ज़ोर दिया। राज्यसभा सांसद का यह कदम डिलीवरी पार्टनर्स को रोज़ाना होने वाली दिक्कतों को समझने के मकसद से था, यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे उन्होंने संसद और पब्लिक प्लेटफॉर्म पर भी उठाया है।


सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में, चड्ढा ब्लिंकिट की पीली यूनिफॉर्म पहने, हेलमेट लगाए और एक डिलीवरी एजेंट की मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे शहर भर में ऑर्डर पूरे करते दिख रहे हैं। विज़ुअल्स में वह वर्कर के साथ डिलीवरी करते हुए दिख रहे हैं, जो प्लेटफॉर्म पर एक रेगुलर शिफ्ट जैसा लग रहा है। अपने दिन भर के वीडियो को शेयर करते हुए चड्ढा ने लिखा- "बोर्डरूम से दूर, ज़मीनी स्तर पर मैंने उनका दिन जिया।"


चड्ढा का यह कदम ऐसे समय में आया है जब गिग वर्कर्स पॉलिसी में बदलाव की बढ़ती मांग कर रहे हैं, जिसमें 10-मिनट मॉडल जैसी बहुत तेज़ डिलीवरी टाइमलाइन को खत्म करने की मांग भी शामिल है, जिसके बारे में वर्कर्स का कहना है कि इससे दबाव और सुरक्षा जोखिम बढ़ते हैं। AAP सांसद पिछले कुछ महीनों से गिग वर्कर्स की हालत के बारे में खुलकर बोल रहे हैं। उन्होंने एक डिलीवरी एजेंट को लंच पर भी बुलाया और सैलरी, सुरक्षा और नौकरी की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उजागर करने के लिए उसके साथ इंटरव्यू भी किए। इस महीने की शुरुआत में चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के बिजनेस मॉडल की आलोचना करते हुए कहा था कि अगर कंपनियों को काम करने के लिए पुलिस की मदद की ज़रूरत पड़ती है, तो यह इस बात का सबूत है कि सिस्टम काम नहीं करता।


 चड्ढा की यह टिप्पणी ज़ोमैटो और ब्लिंकिट के फाउंडर दीपेंद्र गोयल की डिलीवरी वर्कर्स की हालिया हड़तालों के दौरान की गई टिप्पणियों के बाद आई है। गोयल ने हड़ताल करने वाले वर्कर्स को "बदमाश" बताया था और यह तर्क दिया था कि डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा की हैं। इस पर जवाब देते हुए चड्ढा ने लिखा, “पूरे भारत में डिलीवरी पार्टनर बुनियादी सम्मान, सही सैलरी, सुरक्षा, तय नियमों और सोशल सिक्योरिटी की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए। प्लेटफॉर्म का जवाब था कि उन्हें 'बदमाश' कहा जाए और मज़दूरों की मांग को कानून-व्यवस्था का मामला बना दिया जाए। यह न सिर्फ़ अपमानजनक है, बल्कि खतरनाक भी है।” उन्होंने आगे कहा, “सही सैलरी मांगने वाले मज़दूर अपराधी नहीं होते।”
 


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vasudha

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