शीतलाष्टमी पर नहीं चलाया जाता चूल्हा, आरोग्य की देवी को चढ़ाया जाता है सिर्फ बासी भाेग
punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 06:04 PM (IST)
नारी डेस्क: शीतला अष्टमी जिसे कई जगह बसोड़ा भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व आमतौर पर Holi के बाद आने वाली अष्टमी को मनाया जाता है और इसमें शीतला माता की पूजा की जाती है। माता शीतला को शीतलता, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा की देवी माना जाता है।

बासी या ठंडा भोजन अर्पित करने की परंपरा
इस दिन एक विशेष परंपरा निभाई जाती है। भक्त अष्टमी से एक दिन पहले (सप्तमी को) भोजन बनाकर रखते हैं और अष्टमी के दिन वही ठंडा या बासी भोजन माता शीतला को अर्पित करते हैं। आमतौर पर मीठे चावल, पूड़ी, पुआ (मीठा पकवान), कढ़ी, अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। इन व्यंजनों को अगले दिन बिना गर्म किए माता को भोग लगाया जाता है और फिर परिवार के लोग भी यही प्रसाद ग्रहण करते हैं।
ठंडे भोजन का धार्मिक महत्व
माता शीतला को शीतलता और शांति की देवी माना जाता है। इसलिए इस दिन आग जलाकर गर्म भोजन बनाना उनकी प्रकृति के विपरीत माना जाता है। ठंडा भोजन अर्पित करना माता को प्रसन्न करने का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन अगर चूल्हा जलाया जाए तो माता नाराज हो सकती हैं। इसलिए भक्त पहले दिन ही भोजन बनाकर रखते हैं और अष्टमी के दिन उसी का भोग लगाते हैं।

स्वास्थ्य से जुड़ा कारण
पुराने समय में यह पर्व लोगों को साफ-सफाई और मौसमी बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करने का भी तरीका था। माता शीतला की पूजा से चेचक जैसी बीमारियों से रक्षा की मान्यता भी रही है। इस तरह शीतला अष्टमी श्रद्धा, परंपरा और स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण त्योहार है।

