रातभर प्राइवेट पार्ट में रहती है खुजली, बैठते ही आती है बदबू? डॉक्टर से जानिए बचाव के तरीके

punjabkesari.in Tuesday, Jun 30, 2026 - 10:02 AM (IST)

नारी डेस्क: गर्मी और उमस का मौसम महिलाओं के लिए कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लेकर आता है। इस दौरान शरीर में पसीना अधिक निकलता है और प्राइवेट एरिया में लगातार नमी बनी रहती है। ऐसे वातावरण में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे खुजली, जलन, बदबू, रैशेज और विभिन्न प्रकार के इंफेक्शन होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। अस्पतालों और क्लीनिकों में गर्मियों के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं पहुंचती हैं, जिन्हें इंटीमेट एरिया से जुड़ी समस्याएं होती हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में नियमित सफाई और कुछ आसान हाइजीन आदतों को अपनाकर इन परेशानियों से बचा जा सकता है।

इंटीमेट एरिया का प्राकृतिक संतुलन कैसे करता है सुरक्षा?

महिलाओं के प्राइवेट एरिया में प्राकृतिक रूप से कुछ अच्छे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो वहां के पीएच लेवल को संतुलित बनाए रखते हैं। यही संतुलन बैक्टीरिया, फंगस और अन्य हानिकारक सूक्ष्म जीवों से शरीर की रक्षा करता है। लेकिन जब गर्मी, पसीना, लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना, टाइट कपड़ों का इस्तेमाल या साफ-सफाई में लापरवाही होती है, तब यह प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने लगता है। इसके बाद हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ने लगते हैं, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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किन कारणों से बढ़ जाता है इंफेक्शन का खतरा

गर्मियों में कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जो इंटीमेट इंफेक्शन की संभावना को और बढ़ा देती हैं। लगातार पसीना आना, विशेषकर एक्सरसाइज के बाद, सिंथेटिक या बहुत टाइट कपड़े पहनना, शरीर में हार्मोनल बदलाव, डायबिटीज, पर्याप्त पानी न पीना, कमजोर इम्यूनिटी और प्राइवेट एरिया की साफ-सफाई का सही तरीके से ध्यान न रखना प्रमुख कारण माने जाते हैं।

गर्मियों में महिलाओं को होने वाली आम समस्याएं

फंगल (यीस्ट) इंफेक्शन

गर्मी और नमी के कारण फंगस तेजी से बढ़ती है। इसके कारण लगातार खुजली, जलन, त्वचा का लाल होना और सफेद रंग का गाढ़ा डिस्चार्ज जैसी शिकायतें सामने आ सकती हैं। यदि समय रहते इलाज न कराया जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है।

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बैक्टीरियल वैजिनोसिस (BV)

जब प्राइवेट एरिया में मौजूद अच्छे और खराब बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है, तब बैक्टीरियल वैजिनोसिस की समस्या हो सकती है। इसमें दुर्गंधयुक्त सफेद या ग्रे रंग का डिस्चार्ज, जलन और असहजता महसूस होती है।

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यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)

गर्मी में शरीर में पानी की कमी और हाइजीन की अनदेखी के कारण यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके लक्षणों में पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेल्विक एरिया में दर्द और कभी-कभी बुखार भी शामिल हो सकता है।

रैशेज और त्वचा में जलन

लगातार पसीना और त्वचा के बीच घर्षण होने से प्राइवेट एरिया में लाल चकत्ते, रैशेज और जलन की समस्या भी आम हो जाती है।

इंटीमेट एरिया की सफाई का सही तरीका

प्राइवेट एरिया की सफाई करते समय केवल बाहरी हिस्से को हल्के गुनगुने पानी से धोना पर्याप्त होता है। तेज खुशबू वाले साबुन, केमिकल युक्त प्रोडक्ट या हार्श क्लेंजर का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये प्राकृतिक पीएच लेवल को नुकसान पहुंचा सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।

सूखा और साफ रखना भी है बेहद जरूरी

नहाने या टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद प्राइवेट एरिया को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है। यदि वहां नमी बनी रहती है तो फंगस और बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिल जाता है। साफ और सूखा तौलिया इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

कॉटन के कपड़े और नियमित अंडरगार्मेंट बदलना क्यों जरूरी है?

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में हमेशा कॉटन के अंडरगार्मेंट पहनने चाहिए क्योंकि यह पसीना सोखने के साथ हवा का संचार भी बनाए रखते हैं। वहीं सिंथेटिक कपड़े नमी को रोकते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। यदि अधिक पसीना आता है या एक्सरसाइज की है, तो दिन में कम से कम दो बार अंडरगार्मेंट बदलना चाहिए।

पीरियड्स के दौरान रखें अतिरिक्त सावधानी

मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सैनिटरी पैड या टैम्पोन को हर 4 से 6 घंटे में बदलना जरूरी है। लंबे समय तक एक ही पैड का इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

गीले कपड़े पहनने की गलती न करें

स्विमिंग के बाद गीला स्विमसूट, जिम के बाद पसीने से भीगे कपड़े या नम अंडरगार्मेंट लंबे समय तक पहनना बिल्कुल ठीक नहीं है। ऐसे कपड़े बैक्टीरिया और फंगस के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं।

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टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद सफाई का सही तरीका

महिलाओं को हमेशा टॉयलेट के बाद आगे से पीछे (Front to Back) की दिशा में सफाई करनी चाहिए। इससे मलद्वार के बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट या योनि तक नहीं पहुंचते और यूटीआई का खतरा काफी कम हो जाता है।

सही खानपान भी रखता है इंटीमेट एरिया को स्वस्थ

केवल साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि खानपान भी महिलाओं की इंटीमेट हेल्थ को प्रभावित करता है। गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और यूरिन इंफेक्शन का खतरा कम हो। दही और अन्य प्रोबायोटिक फूड्स अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जिससे वैजाइनल फ्लोरा स्वस्थ बना रहता है। इसके अलावा ताजे फल, हरी सब्जियां और विटामिन-सी से भरपूर खाद्य पदार्थ इम्यूनिटी मजबूत करते हैं और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

किन चीजों से दूरी बनाना बेहतर है?

अधिक मात्रा में चीनी वाले खाद्य पदार्थ फंगल इंफेक्शन को बढ़ावा दे सकते हैं। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा कैफीन, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक मसालेदार भोजन शरीर में डिहाइड्रेशन और इरिटेशन बढ़ा सकते हैं। इसलिए गर्मियों में इनका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर रहता है।

स्वस्थ जीवनशैली भी है जरूरी

इंटीमेट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित वजन, पर्याप्त नींद, तनाव को नियंत्रित रखना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली डाइट अपनाना बेहद जरूरी है। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।

किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

गर्मी के कारण हल्की खुजली या पसीने से होने वाली सामान्य जलन अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन यदि लगातार तेज खुजली हो, असामान्य या बदबूदार सफेद डिस्चार्ज आए, पेशाब करते समय तेज जलन हो, पेल्विक एरिया में दर्द महसूस हो या बदबू लगातार बनी रहे, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी फंगल, बैक्टीरियल या यूरिनरी इंफेक्शन का संकेत हो सकते हैं। समय रहते स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच और उचित उपचार कराने से समस्या गंभीर होने से रोकी जा सकती है।
  
 

 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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